zindagi tujh ko bhi aur teraa tamasha dekhooñ | ज़िंदगी तुझ को भी और तेरा तमाशा देखूँ

  - Dheerendra Singh Faiyaz
ज़िंदगीतुझकोभीऔरतेरातमाशादेखूँ
अपनीमासूमसीआँखोंसेमैंक्याक्यादेखूँ
क्यासिवाइसकेभलाऔरनज़ारादेखूँ
रातकीशाख़पेउसचाँदकोबैठादेखूँ
रक़्सकरताहुआगुज़राहैअभीहिज्रकादुख
धूलछटजाएतोआगेकाभीरस्तादेखूँ
एकवोदिनथाकिइकशख़्सथादुनियामेरी
एकयेदिनहैकिहरशख़्समेंदुनियादेखूँ
मेरीनिय्यततोबहुतबारपरखलीउसने
मैंभीउसशख़्सकाइसबारइरादादेखूँ
वक़्तकेसाथतोख़ुदवक़्तबदलजाताहै
सोहीख़्वाहिशहैकिमैंख़ुदकोबदलतादेखूँ
औरतूबोलपड़ेपलकेंतोझपकायाकरो
सोचताहूँतिरीतस्वीरकोइतनादेखूँ
  - Dheerendra Singh Faiyaz
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