rakh li maathe pe shikan us ki nishaani jaise | रख ली माथे पे शिकन उस की निशानी जैसे

  - Dheerendra Singh Faiyaz
रखलीमाथेपेशिकनउसकीनिशानीजैसे
नएघरमेंहोरखीचीज़पुरानीजैसे
ऐसेभूलीहैमिरीआँखहुनररोनेका
किसीझरनेसेबिछड़जाएरवानीजैसे
तेरीआँखोंसेभलाकैसेहटाऊँआँखें
मुझपेखुलतेहीनहींइनकेमआ'नीजैसे
आइनाकहनेलगाकुछकमीतुझमेंभीहै
हमनेभीपूछधराउससेकिया'नीजैसे
वोकिसीशे'रमेंढलजाएग़नीमतवर्ना
उसकोतफ़्सीलसेलिक्खूंगाकहानीजैसे
हमतिरेहिज्रमेंसहराकीतरफ़क्यूँभागें
हमनेसीखीहीनहींख़ाकउड़ानीजैसे
मैंनेहररोज़तुझेदिलसेनिकालातोमगर
किसीदरियासेनिकालेकोईपानीजैसे
क्याबुराहैकिजोबातिनहैवहीज़ाहिरहै
हमकोआतीहीनहींबातबनानीजैसे
  - Dheerendra Singh Faiyaz
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