kisi qalam se kisi ki zabaan se chaltaa hooñ | किसी क़लम से किसी की ज़बाँ से चलता हूँ

  - Dheerendra Singh Faiyaz
किसीक़लमसेकिसीकीज़बाँसेचलताहूँ
मैंतीरकिसकाहूँकिसकीकमाँसेचलताहूँ
मैंथकगयाहूँठहरकरकिसीसमुंदरसा
बा-रंग-ए-अब्रतिरेआस्ताँसेचलताहूँ
तूछोड़देगाअधूरामुझेकहानीमें
इसीलिएमैंतिरीदास्ताँसेचलताहूँ
जोमेरेसीनेकेबाएँतरफ़धड़कताहै
उसीकेनक़्श-ए-क़दमपरवहाँसेचलताहूँ
यहाँसेचलनेकामतलबतोऔरहैलेकिन
मैंथकचुकाहूँमिरीजाँयहाँसेचलताहूँ
अबअगरचाहेतोलोगोंकेबीचलेआना
मैंआजअपनेतिरेदरमियाँसेचलताहूँ
जानेकैसेसफ़रमेंहूँमुब्तला'फ़य्याज़'
वहींपेआताहूँवापसजहाँसेचलताहूँ
  - Dheerendra Singh Faiyaz
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