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Harsh saxena
jaadon ki raatein us par bhi tumse ye judaai
jaadon ki raatein us par bhi tumse ye judaai | जाड़ों की रातें उस पर भी तुम सेे ये जुदाई
- Harsh saxena
जाड़ों
की
रातें
उस
पर
भी
तुम
सेे
ये
जुदाई
बाहों
की
छोड़ो
हमको
हासिल
नहीं
रजाई
- Harsh saxena
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क्यूँ
हिज्र
के
सभी
को
क़िस्से
सुना
रहे
हो
ग़म
बेचते
हो
सबको
ग़म
की
दुकान
हो
तुम
Amaan Pathan
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हिज्र
की
रातें
इतनी
भारी
होती
हैं
जैसे
छाती
पर
ऐरावत
बैठा
हो
Tanoj Dadhich
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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हिज्र
में
इश्क़
यूँँ
रखा
आबाद
हिचकियाँ
तन्हा
तन्हा
लेते
रहे
Siraj Tonki
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ख़ुदा
करे
कि
तिरी
उम्र
में
गिने
जाएँ
वो
दिन
जो
हम
ने
तिरे
हिज्र
में
गुज़ारे
थे
Ahmad Nadeem Qasmi
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तुम
सेे
बिछड़
जाने
का
ख़याल
अच्छा
है
क्योंकि
अभी
मेरा
भी
हाल
अच्छा
है
उसने
पूछा
तुम्हें
कितनी
महोब्बत
है
मुझ
सेे
मैंने
कहा
मालूम
नहीं
सवाल
अच्छा
है
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karan singh rajput
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हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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बता
रहा
है
झटकना
तेरी
कलाई
का
ज़रा
भी
रंज
नहीं
है
तुझे
जुदाई
का
मैं
ज़िंदगी
को
खुले
दिल
से
खर्च
करता
था
हिसाब
देना
पड़ा
मुझको
पाई-पाई
का
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Azhar Faragh
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हिज्र
में
ख़ुद
को
तसल्ली
दी
कहा
कुछ
भी
नहीं
दिल
मगर
हँसने
लगा
आया
बड़ा
कुछ
भी
नहीं
Afkar Alvi
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रेल
की
सीटी
में
कैसे
हिज्र
की
तम्हीद
थी
उसको
रुख़्सत
करके
घर
लौटे
तो
अंदाज़ा
हुआ
Parveen Shakir
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इसी
ख़्वाब
में
ज़ाया'
किया
'ईद
को
हर
दम
कभी
बोले
वो
सीने
से
लगकर
मुबारक
हो
Harsh saxena
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इस
ज़माने
में
भी
इक
लड़का
तुम्हें
यूँँ
चाहता
है
अपने
रब
से
वो
तुम्हारी
जैसी
बेटी
माँगता
है
Harsh saxena
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फ़रेब
दे
गया
इस
सादगी
से
वो
मुझको
कि
जुर्म
सारा
ही
मजबूरियों
के
सर
आया
Harsh saxena
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हमने
सँभाल
रक्खे
हैं
अपनी
तिज़ोरी
में
उसके
दिए
वो
तोहफ़े
नहीं
हैं
ख़ज़ाने
हैं
Harsh saxena
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जज़्बातों
को
सहज
लफ्ज़ों
में
पिरोता
हूँ
मैं
लिखता
फ़क़त
वही
हूँ
जो
सच
में
होता
हूँ
मैं
Harsh saxena
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