phir us ke ba'ad badan tha na jaan jaan men thii | फिर उस के बा'द बदन था न जान जान में थी

  - Dheerendra Singh Faiyaz
फिरउसकेबा'दबदनथाजानजानमेंथी
अजबचढ़ाईमिरीउम्रकीढलानमेंथी
तुम्हाराअक्समिरेआँसुओंमेंरौशनथा
तुम्हारीशक्लभीहरवक़्तमेरेध्यानमेंथी
तमामउम्रगँवादीतलाशमेंउसकी
जोएकशयमिरीथीइसजहानमेंथी
मुझेबयानभीकरतीथींदूसरीआँखें
मिरीज़बानभीशायदकिसीज़बानमेंथी
वोढूँढताथाजहाँपरवहाँनहींथामैं
मिरीकहानीकिसीऔरदास्तानमेंथी
तनाब-ए-इश्क़तिरेहाथहीसेछूटीहै
तूएकउम्रसेमशग़ूलखींच-तानमेंथी
हमारेपैरोंसेखिसकीहुईज़मीं'फ़य्याज़'
उतारलाएउसेहमजोआसमानमेंथी
  - Dheerendra Singh Faiyaz
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