dekhte dekhte hi saal guzar jaata hai | देखते देखते ही साल गुज़र जाता है

  - Dheerendra Singh Faiyaz
देखतेदेखतेहीसालगुज़रजाताहै
परतिराग़महैकिबढ़ताहैठहरजाताहै
तैरतीरहतीहैआँखोंमेंतूहरशबऐसे
जैसेदरियामेंकोईचाँदउतरजाताहै
कौनउसख़्वाबकीता'बीरपेकरताहैयक़ीं
ख़्वाबजोनींदसेलड़ताहुआमरजाताहै
हमनेआँखोंकीज़बानोंपेलगाएहैंक़ुफ़्ल
वर्नादिलतेरीहीआवाज़ोंसेभरजाताहै
कोईहररोज़मुझेछोड़केमरजाताहै
जानेवोकौनहैकैसाहैकिधरजाताहै
एकहीवक़्तमेंसुख-दुखनहींमिलतेमुझको
पाँवगरअपनेबचाऊँतोसफ़रजाताहै
फिरसेदुनियाकीतरफ़ध्यानलगायाहैमगर
ख़ाकइतनेमेंतिरादिलसेअसरजाताहै
  - Dheerendra Singh Faiyaz
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