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Dharmesh Solanki
dekh lo KHud ko rakh ke meri jagah
dekh lo KHud ko rakh ke meri jagah | देख लो ख़ुद को रख के मेरी जगह
- Dharmesh Solanki
देख
लो
ख़ुद
को
रख
के
मेरी
जगह
बे-वफ़ा
थोड़ा
कम
लगूँगा
मैं
- Dharmesh Solanki
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चले
चलिए
कि
चलना
ही
दलील-ए-कामरानी
है
जो
थक
कर
बैठ
जाते
हैं
वो
मंज़िल
पा
नहीं
सकते
Hafeez Banarasi
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मेरे
नाम
से
क्या
मतलब
है
तुम्हें
मिट
जाएगा
या
रह
जाता
है
जब
तुम
ने
ही
साथ
नहीं
रहना
फिर
पीछे
क्या
रह
जाता
है
मेरे
पास
आने
तक
और
किसी
की
याद
उसे
खा
जाती
है
वो
मुझ
तक
कम
ही
पहुँचता
है
किसी
और
जगह
रह
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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बुरी
सरिश्त
न
बदली
जगह
बदलने
से
चमन
में
आ
के
भी
काँटा
गुलाब
हो
न
सका
Arzoo Lakhnavi
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जो
तुम्हें
मंज़िल
पे
ले
जाएँगी
वो
राहें
अलग
हैं
मैं
वो
रस्ता
हूँ
कि
जिस
पर
तुम
भटक
कर
आ
गई
हो
Harman Dinesh
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जिसे
मंज़िल
बताया
जा
रहा
था
वो
रस्ते
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
है
Atul K Rai
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और
उसको
ढूढ़ता
मैं
किस
जगह
पास
ही
थी
और
कितनी
दूर
थी
Umesh Maurya
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तुम्हें
लगा
है
कि
मेरे
होते,
तुम्हें
भी
दिल
में
जगह
मिलेगी
बड़ी
ही
इज़्ज़त
से
कह
रहा
हूँ
,चलो
उठो
अब
मेरी
जगह
से
Shadab Asghar
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जगह
की
क़ैद
नहीं
थी
कोई
कहीं
बैठे
जहाँ
मक़ाम
हमारा
था
हम
वहीं
बैठे
अमीर-ए-शहर
के
आने
पे
उठना
पड़ता
है
लिहाज़ा
अगली
सफ़ों
में
कभी
नहीं
बैठे
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Mehshar Afridi
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मंज़िल
मिली
तो
उसकी
कमी
हमको
खा
गई
सामान
रास्ते
में
जो
खोना
पड़ा
हमें
Abbas Qamar
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मेरा
भी
एक
बाप
था
अच्छा
सा
एक
बाप
वो
जिस
जगह
पहुँच
के
मरा
था
वहीं
हूँ
मैं
Rais Farog
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अच्छा
हुआ
जवाब
न
आया
नहीं
तो
दोस्त
ता-उम्र
उस
जवाब
से
बाहर
न
आता
मैं
Dharmesh Solanki
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हो
गई
शब
न
कर
उदास
मुझे
खींच
जल्दी
से
अपने
पास
मुझे
ऐ
ख़ुशी
जा
कि
तेरा
अब
क्या
काम
आ
गई
है
उदासी
रास
मुझे
मेरी
तकलीफ़
कुछ
तो
कम
होती
जो
नज़र
आती
तुम
उदास
मुझे
ज़िम्मे-दारी
ही
पहने
फिरता
हूँ
कैसे
देखोगे
ख़ुश-लिबास
मुझे
अपने
ज़ेवर
नज़र
में
रखते
हैं
लोग
वो
भी
रखता
है
आस-पास
मुझे
आज
भी
भेजी
ख़त
में
कड़वाहट
आज
तो
भेजते
मिठास
मुझे
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Dharmesh Solanki
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अपने
वालिद
की
रख
गई
इज़्ज़त
मुझ
सेे
अगले
जनम
का
वा'दा
किया
Dharmesh Solanki
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कि
कटती
है
सफ़र-ए-ज़ीस्त
कैसे
यार
बग़ैर
सुलगती
रेत
पे
देखो
बरहना-पा
चल
कर
Dharmesh Solanki
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ये
अब
सहा
नहीं
जाता
कि
इक
ही
महफ़िल
में
रहे
तू
और
मैं
फिर
भी
हमारी
बात
न
हो
Dharmesh Solanki
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