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Dharmesh Solanki
apne walid ki rakh gaii izzat
apne walid ki rakh gaii izzat | अपने वालिद की रख गई इज़्ज़त
- Dharmesh Solanki
अपने
वालिद
की
रख
गई
इज़्ज़त
मुझ
सेे
अगले
जनम
का
वा'दा
किया
- Dharmesh Solanki
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तू
मोहब्बत
नहीं
समझती
है
हम
भी
अपनी
अना
में
जलते
हैं
इस
दफा
बंदिशें
ज़ियादा
हैं
छोड़
अगले
जनम
में
मिलते
हैं
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Ritesh Rajwada
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बे-ख़ुदी
ले
गई
कहाँ
हम
को
देर
से
इंतिज़ार
है
अपना
Meer Taqi Meer
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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ज़ख़्म
की
इज़्ज़त
करते
हैं
देर
से
पट्टी
खोलेंगे
चेहरा
पढ़ने
वाले
चोर
गठरी
थोड़ी
खोलेंगे
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Khurram Afaq
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मोहब्बत
नेक-ओ-बद
को
सोचने
दे
ग़ैर-मुमकिन
है
बढ़ी
जब
बे-ख़ुदी
फिर
कौन
डरता
है
गुनाहों
से
Arzoo Lakhnavi
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अना
को
अपनी
समझाना
पड़ेगा
बुलाती
है,
तो
फिर
जाना
पड़ेगा
Salman Zafar
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हम
ने
क़ुबूल
कर
लिया
अपना
हर
एक
जुर्म
अब
आप
भी
तो
अपनी
अना
छोड़
दीजिए
Harsh saxena
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दिन
रात
मय-कदे
में
गुज़रती
थी
ज़िंदगी
'अख़्तर'
वो
बे-ख़ुदी
के
ज़माने
किधर
गए
Akhtar Shirani
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होश
वालों
को
ख़बर
क्या
बे-ख़ुदी
क्या
चीज़
है
इश्क़
कीजे
फिर
समझिए
ज़िंदगी
क्या
चीज़
है
Nida Fazli
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ज़िंदा
रहने
की
ये
तरक़ीब
निकाली
हमने
बात
बिगड़ी
हुई
कुछ
ऐसे
सँभाली
हमने
उस
सेे
समझौता
किया
है
उसी
की
शर्तों
पे
जान
भी
बच
गई
इज़्ज़त
भी
बचा
ली
हमने
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Divyansh Shukla
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ऐ
क़लमकार
तू
कर
सकता
है
कुछ
अब
भी
कमाल
इस
कहानी
में
उसे
कर
मिरा
मुझ
में
जाँ
डाल
Dharmesh Solanki
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बता
भी
दो
ज़रा
तुम
मेरा
दिल
कब
तक
दुखाओगे
कभी
मिलने
भी
आओगे
कि
बस
यूँँही
रुलाओगे
Dharmesh Solanki
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दुनिया
जो
कहती
थी
वो
किए
जा
रहे
थे
हम
अफ़सोस
आप
ने
जो
कहा
था
नहीं
किया
Dharmesh Solanki
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पहले
तो
बर्बादियों
का
जश्न
होना
चाहिए
बाद
में
आराम
से
अच्छे
से
रोना
चाहिए
Dharmesh Solanki
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पर्दा
उठा
कर
देखा
उसे
तब
हुआ
मालूम
इक
चाँद
ज़मीं
पर
भी
है
कल
शब
हुआ
मालूम
Dharmesh Solanki
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