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Dharmesh Solanki
ye ab saha nahin jaata ki ik hi mehfil men
ye ab saha nahin jaata ki ik hi mehfil men | ये अब सहा नहीं जाता कि इक ही महफ़िल में
- Dharmesh Solanki
ये
अब
सहा
नहीं
जाता
कि
इक
ही
महफ़िल
में
रहे
तू
और
मैं
फिर
भी
हमारी
बात
न
हो
- Dharmesh Solanki
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मैं
ने
आबाद
किए
कितने
ही
वीराने
'हफ़ीज़'
ज़िंदगी
मेरी
इक
उजड़ी
हुई
महफ़िल
ही
सही
Hafeez Banarasi
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पहले-पहल
तो
लड़
लिए
अल्लाह
से
मगर
अब
पेश
आ
रहे
हैं
बड़ी
आजिज़ी
से
हम
Amaan Pathan
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महीनों
तक
रहा
करते
थे
सब
मेहमान
आँखों
में,
मगर
अब
ख़्वाब
भी
आते
नहीं
वीरान
आँखों
में
ज़मान
ए
हिज्र
कहने
को
रिवाज़
ए
इश्क़
ही
तो
है,
मगर
क्या
क्या
नहीं
होता
है
इस
दौरान
आँखों
में
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Darpan
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अदब
ता'लीम
का
जौहर
है
ज़ेवर
है
जवानी
का
वही
शागिर्द
हैं
जो
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Chakbast Brij Narayan
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मुझे
अँधेरे
से
बात
करनी
है
सो
करा
दो,
दिया
बुझा
दो
कुछ
एक
लम्हों
को
रौशनी
का
गला
दबा
दो,
दिया
बुझा
दो
रिवाज़-ए-महफ़िल
निभा
रहा
हूँ
बता
रहा
हूँ
मैं
जा
रहा
हूँ
मुझे
विदा
दो,
जो
रोना
चाहे
उन्हें
बुला
दो,
दिया
बुझा
दो
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Vikram Gaur Vairagi
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पहले
कहता
है
जुनूँ
उसका
गिरेबान
पकड़
फिर
मेरा
दिल
मुझे
कहता
है
इधर
कान
पकड़
ऐसी
वहशत
भी
न
हो
घर
के
दरो
बाम
कहें
कोई
आवाज़
ही
ले
आ
कोई
मेहमान
पकड़
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Azbar Safeer
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महफ़िल
में
बैठे
लोगों
को
भाने
लगी
जब
वो
मेरे
अश'आर
फ़रमाने
लगी
Rachit Sonkar
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उसने
महफ़िल
से
उठाया
हमको
जिसको
पलकों
पे
बिठाया
हमने
Vishal Bagh
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अगर
लगता
है
वो
क़ाबिल
नहीं
है
तो
रिश्ता
तोड़ना
मुश्किल
नहीं
है
रक़ीब
आया
है
मेरे
शे'र
सुनने
तो
अब
ये
जंग
है
महफ़िल
नहीं
है
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Tanoj Dadhich
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बात
करनी
मुझे
मुश्किल
कभी
ऐसी
तो
न
थी
जैसी
अब
है
तेरी
महफ़िल
कभी
ऐसी
तो
न
थी
Bahadur Shah Zafar
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चुप-चाप
बैठे
रहते
हैं
अब
तो
अपने
घर
में
होली
तो
पहले
खेला
करते
थे
यार
हम
लोग
Dharmesh Solanki
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अच्छे
दिन
लाएगा
यक़ीं
है
मुझे
वो
सियासी
नहीं
ख़ुदा
है
दोस्त
Dharmesh Solanki
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कि
कटती
है
सफ़र-ए-ज़ीस्त
कैसे
यार
बग़ैर
सुलगती
रेत
पे
देखो
बरहना-पा
चल
कर
Dharmesh Solanki
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हम
दोनों
को
ऐ
दोस्त
जगह
मिल
गई
जिस
में
उस
लड़की
का
दिल
कितना
बड़ा
होगा
ज़रा
सोच
Dharmesh Solanki
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इजाज़त
हो
तो
मैं
वो
दर्द
छिन
लूँ
जो
तेरे
दिल
के
कोने
में
पड़ा
है
Dharmesh Solanki
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