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Dharmesh Solanki
achchhe din laayega yaqeen hai mujhe
achchhe din laayega yaqeen hai mujhe | अच्छे दिन लाएगा यक़ीं है मुझे
- Dharmesh Solanki
अच्छे
दिन
लाएगा
यक़ीं
है
मुझे
वो
सियासी
नहीं
ख़ुदा
है
दोस्त
- Dharmesh Solanki
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सियासत
के
चेहरे
पे
रौनक़
नहीं
ये
औरत
हमेशा
की
बीमार
है
Shakeel Jamali
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हमारे
ख़ौफ़
से
बाज़ार
उछलते
हैं
जहाँ
भर
में
सिसकने
से
हमारे
कौन
सी
सरकार
गिरती
है
Nomaan Shauque
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दो
मुल्कों
के
सियासी
खेल
में
जाने
यहाँ
पर
कितनों
के
घर
उजड़े
हैं
मौला
वही
हर
सुब्ह
मंज़र
देखना
पड़ता
हज़ारों
लोग
यूँँ
ही
मरते
हैं
मौला
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Harsh saxena
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वो
हिंदू,
मैं
मुस्लिम,
ये
सिक्ख,
वो
ईसाई
यार
ये
सब
सियासत
है
चलो
इश्क़
करें
Rahat Indori
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दीवार
उठाने
की
तिजारत
नहीं
आई
दिल्ली
में
रहे
और
सियासत
नहीं
आई
बिकने
को
तो
दिल
बिक
गया
बाज़ार
में
लेकिन
जो
आप
बताते
थे
वो
क़ीमत
नहीं
आई
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Obaid Azam Azmi
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मुल्क
तो
मुल्क
घरों
पर
भी
है
क़ब्ज़ा
उस
का
अब
तो
घर
भी
नहीं
चलते
हैं
सियासत
के
बग़ैर
Zia Zameer
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उन
का
जो
फ़र्ज़
है
वो
अहल-ए-सियासत
जानें
मेरा
पैग़ाम
मोहब्बत
है
जहाँ
तक
पहुँचे
Jigar Moradabadi
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सरकार
कहने
लग
गया
वो
सीधे
नाम
से
जो
हम-क़लाम
कम
था
मेरे
पहले
नाम
से
मुझ
सेे
बिछड़
के
अपना
कोई
नाम
रख
लियो
सब
लोग
जानते
हैं
तुझे
मेरे
नाम
से
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Rishabh Sharma
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कितना
दुश्वार
है
जज़्बों
की
तिजारत
करना
एक
ही
शख़्स
से
दो
बार
मोहब्बत
करना
जिस
को
तुम
चाहो
कोई
और
न
चाहे
उस
को
इस
को
कहते
हैं
मोहब्बत
में
सियासत
करना
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Liaqat Jafri
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सजा
दूँ
मांँग
मैं
तेरी
लहू
से
आज
मैं
अपने
बुरा
मानो
अगर
मेरे
न
तुम
सरकार,
होली
में
Shashank Shekhar Pathak
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सितम
कि
वो
कभी
आया
नहीं
मिरी
जानिब
अना
कि
मैं
भी
कभी
ढूँढने
न
निकला
उसे
Dharmesh Solanki
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मर
गया
होता
तिरी
शादी
से
पहले
गर
न
होती
मुझ
पे
घर
की
ज़िम्मेदारी
Dharmesh Solanki
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हम
दोनों
को
ऐ
दोस्त
जगह
मिल
गई
जिस
में
उस
लड़की
का
दिल
कितना
बड़ा
होगा
ज़रा
सोच
Dharmesh Solanki
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कि
कटती
है
सफ़र-ए-ज़ीस्त
कैसे
यार
बग़ैर
सुलगती
रेत
पे
देखो
बरहना-पा
चल
कर
Dharmesh Solanki
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पर्दा
उठा
कर
देखा
उसे
तब
हुआ
मालूम
इक
चाँद
ज़मीं
पर
भी
है
कल
शब
हुआ
मालूम
Dharmesh Solanki
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