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Shashank Shekhar Pathak
saja doon maang main teri lahu se aaj main apne
saja doon maang main teri lahu se aaj main apne | सजा दूँ मांँग मैं तेरी लहू से आज मैं अपने
- Shashank Shekhar Pathak
सजा
दूँ
मांँग
मैं
तेरी
लहू
से
आज
मैं
अपने
बुरा
मानो
अगर
मेरे
न
तुम
सरकार,
होली
में
- Shashank Shekhar Pathak
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दो
मुल्कों
के
सियासी
खेल
में
जाने
यहाँ
पर
कितनों
के
घर
उजड़े
हैं
मौला
वही
हर
सुब्ह
मंज़र
देखना
पड़ता
हज़ारों
लोग
यूँँ
ही
मरते
हैं
मौला
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Harsh saxena
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इस
दौर-ए-सियासत
का
इतना
सा
फ़साना
है
बस्ती
भी
जलानी
है
मातम
भी
मनाना
है
Unknown
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मुहब्बत
में
हमने
सियासत
न
की
तभी
इश्क़
में
कोई
बरकत
न
की
उसे
मानता
था
मैं
अपना
ख़ुदा
कभी
उसकी
लेकिन
इबादत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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वो
हिंदू,
मैं
मुस्लिम,
ये
सिक्ख,
वो
ईसाई
यार
ये
सब
सियासत
है
चलो
इश्क़
करें
Rahat Indori
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ले
लो
बोसा
अपना
वापस
किस
लिए
तकरार
की
क्या
कोई
जागीर
हम
ने
छीन
ली
सरकार
की
Akbar Merathi
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मुक़ाबिल
फ़ासलों
से
ही
मोहब्बत
डूब
जाएगी
सुनोगी
झूठी
बातें
तुम
हक़ीक़त
डूब
जाएगी
चलेगी
तब
तलक
जब
तक
तिरी
परछाईं
देखेगी
तिरा
जब
हुस्न
देखेगी
सियासत
डूब
जाएगी
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Anurag Pandey
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कितना
दुश्वार
है
जज़्बों
की
तिजारत
करना
एक
ही
शख़्स
से
दो
बार
मोहब्बत
करना
जिस
को
तुम
चाहो
कोई
और
न
चाहे
उस
को
इस
को
कहते
हैं
मोहब्बत
में
सियासत
करना
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Liaqat Jafri
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मुल्क
तो
मुल्क
घरों
पर
भी
है
क़ब्ज़ा
उस
का
अब
तो
घर
भी
नहीं
चलते
हैं
सियासत
के
बग़ैर
Zia Zameer
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उन
का
जो
फ़र्ज़
है
वो
अहल-ए-सियासत
जानें
मेरा
पैग़ाम
मोहब्बत
है
जहाँ
तक
पहुँचे
Jigar Moradabadi
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ऐसा
नहीं
बस
आज
तुझे
प्यार
करेंगे
ता'उम्र
यही
काम
लगातार
करेंगे
सरकार
करेगी
नहीं
इस
देश
का
उद्धार
उद्धार
करेंगे
तो
कलाकार
करेंगे
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Tanoj Dadhich
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दिल
की
ख़ातिर
एक
रिश्ते
को
बचाने
के
लिए
आग
मैंने
ही
लगा
ली
ख़ुद
मिरे
घरबार
में
Shashank Shekhar Pathak
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सब
नहीं
करते
हैं
जो
मैं
बस
वही
करता
हूँ
घर
जला
के
मोहल्ले
में
रोशनी
करता
हूँ
तुम
क्या
छीनोगे
यार
मोहब्बत
मेरी
दुश्मनों
से
भी
मेरे
मैं
दिल
लगी
करता
हूँ
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Shashank Shekhar Pathak
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क्यूँँ
लगाऊँ
जाँ
की
बाज़ी
दिल
के
कारोबार
में?
बिक
रही
है
जब
मोहब्बत
इश्क़
के
बाज़ार
में
हारनी
थी
जंग
मुझको
जीतना
मुझको
न
था
वर्ना
इतना
दम
नहीं
था
उस
सिपहसालार
में
लाख
चाहूँ
मैं
छुपाना
पर
छुपा
पाता
नहीं
ज़िक्र
उसका
आ
ही
जाता
है
मिरे
अश'आर
में
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Shashank Shekhar Pathak
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के
तुझे
कहाँ
मुझ
पर
ऐतबार
होता
था?
दर्द
होता
था
जब
तो
बेश़ुमार
होता
था
उस
दरख़्त
पर
अब
आते
नहीं
परिंदे
भी
जिसकी
छाँव
को
तेरा
इंतज़ार
होता
था
सूइयां
भी
चुभ
जातीं
उँगलियों
में
गर
तेरी
तीर
मेरे
भी
दिल
के
आर-पार
होता
था
क्या
बताऊँ
के
क्या
हासिल
हुआ
मोहब्बत
में?
बारिशों
को
कब
सहराओं
से
प्यार
होता
था?
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Shashank Shekhar Pathak
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पार
जिसको
कर
रहा
था
लड़
के
तूफ़ानों
से
मैं
ख़ुद
वही
मुझको
चला
है
छोड़कर
मझधार
में
Shashank Shekhar Pathak
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