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Dharmesh Solanki
chup-chaap baithe rahte hain ab to apne ghar men
chup-chaap baithe rahte hain ab to apne ghar men | चुप-चाप बैठे रहते हैं अब तो अपने घर में
- Dharmesh Solanki
चुप-चाप
बैठे
रहते
हैं
अब
तो
अपने
घर
में
होली
तो
पहले
खेला
करते
थे
यार
हम
लोग
- Dharmesh Solanki
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यार
बिछड़कर
तुमने
हँसता
बसता
घर
वीरान
किया
मुझको
भी
आबाद
न
रक्खा
अपना
भी
नुक़्सान
किया
Ali Zaryoun
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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जो
सावन
होते
सूखा,
उस
फूल
पे
लानत
हो
मुझ
पे
लानत,
तेरे
होते,
यार
उदासी
है
Siddharth Saaz
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नाराज़गी
का
मेरी
ये
आलम
है
इन
दिनों
है
बंद
अपने
आप
से
भी
बोल-चाल
यार
Rajesh Reddy
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पुराने
यार
भी
आपस
में
अब
नहीं
मिलते
न
जाने
कौन
कहाँ
दिल
लगा
के
बैठ
गया
Fazil Jamili
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कब
लौटा
है
बहता
पानी
बिछड़ा
साजन
रूठा
दोस्त
हम
ने
उस
को
अपना
जाना
जब
तक
हाथ
में
दामाँ
था
Ibn E Insha
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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कोई
दिक़्क़त
नहीं
है
गर
तुम्हें
उलझा
सा
लगता
हूँ
मैं
पहली
मर्तबा
मिलने
में
सबको
ऐसा
लगता
हूँ
ज़रूरी
तो
नहीं
हम
साथ
हैं
तो
कोई
चक्कर
हो
वो
मेरी
दोस्त
है
और
मैं
उसे
बस
अच्छा
लगता
हूँ
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Ali Zaryoun
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इस
से
पहले
कि
बे-वफ़ा
हो
जाएँ
क्यूँँ
न
ऐ
दोस्त
हम
जुदा
हो
जाएँ
Ahmad Faraz
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तुझे
कौन
जानता
था
मेरी
दोस्ती
से
पहले
तेरा
हुस्न
कुछ
नहीं
था
मेरी
शा'इरी
से
पहले
Kaif Bhopali
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हमेशा
हँसती
रहो
ख़ुश
रहो
दुखी
न
रहो
कली
हो
खिलती
हुई
तुम
बुझी
बुझी
न
रहो
Dharmesh Solanki
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रोज़ी-रोटी
कमाया
कर
थोड़ी
शा'इरी
क्या
परोस
कर
देगी?
Dharmesh Solanki
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सितम
कि
वो
कभी
आया
नहीं
मिरी
जानिब
अना
कि
मैं
भी
कभी
ढूँढने
न
निकला
उसे
Dharmesh Solanki
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तुम
ने
चाही
थी
वो
बात
होने
को
है
मुस्कुराओ
मिरी
मात
होने
को
है
Dharmesh Solanki
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जल्द-बाज़ी
न
करना
चमकने
में
दोस्त
रात
में
कोई
सूरज
निकलता
नहीं
Dharmesh Solanki
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