kitne khayal raat ki palkon men aa.e the | कितने ख़याल रात की पलकों में आए थे

  - Deepak Qamar
कितनेख़यालरातकीपलकोंमेंआएथे
किरनोंनेसबचराग़सवेरेबुझाएथे
चलनापड़ाहवाकोभीदामनसँभालकर
फूलोंकेसाथराहमेंकाँटेबिछाएथे
पानीबचाकेरखलियावीरानियोंकेबीच
किसनेहज़ारोंकोससेपंछीबुलाएथे
सरसब्ज़वोहीपेड़हुआमोड़कीतरह
जिसनेहवामेंपँखसेपत्तेउड़ाएथे
रस्म-ओ-रिवाजकीअमरबेलोंनेडसलिया
हमनेअज़लसेख़ुदहीयेबंधनबनाएथे
तारेगएकहाँयेवहींकेवहींरहे
दिनसेछुपाएजोवहीशबनेदिखाएथे
बदलेलिबासआदमीहररुतकेरंगमें
पत्थरकेयुगमेंआजकेकपड़ेसिलायेथे
बाहरफ़क़ीरनेकहींडेरालगालिया
बाज़ारसारेशहरकेहमनेसजाएथे
अल्फ़ाज़काहुजूमथापहचानतेकिसे
कितनेहीबिनबुलाएकिताबोंमेंआएथे
  - Deepak Qamar
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