aag ke phool pe shabnam ke nishaan dhundooge | आग के फूल पे शबनम के निशाँ ढूँडोगे

  - Deepak Qamar
आगकेफूलपेशबनमकेनिशाँढूँडोगे
तुमहक़ीक़तकेलिएवहम-ओ-गुमाँढूँडोगे
कौनसीआसमेंयेसाराजहाँढूँडोगे
एकआवारासीख़ुशबूकोकहाँढूँडोगे
साथकुछरोज़काहैरास्ताचलतेलोगों
हमचलेजाएँगेक़दमोंकेनिशाँढूँडोगे
तीरतरकशमेंअगरबचभीगएतोक्याहै
मिलपाएगीकहींअपनीकमाँढूँडोगे
रातकीगोदमेंख़ुशियोंकेसितारेभरलो
फिरतोसूरजकोलिएऐसासमाँढूँडोगे
जबचलेजाएँगेबंजारेबहारेंलेकर
फूलवालोंकीनगरभरमेंदुकाँढूँडोगे
इससराएसेनिकलआगेबढ़ोगेजबभी
चाँदतारोंसेपरेअपनामकाँढूँडोगे
  - Deepak Qamar
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