kaajal bhara hai nain men aur munh men paan bhi | काजल भरा है नैन में और मुँह में पान भी

  - Deepak Qamar
काजलभराहैनैनमेंऔरमुँहमेंपानभी
मिलतानहींहैरूपकालेकिननिशानभी
अबक्याकहेंवोझाँकनेवालेनहींरहे
नटखटगलीवहीहैऔरबाँकामकानभी
दिलकीपुरानीबाँसुरीलेकरकहींचलें
तरकशकेसाथतोड़देंतीर-ओ-कमानभी
इसतंग-दिलसेशहरमेंक्यासोचकेबसे
आँगनगयाथासाथमेंखोयाहैलॉनभी
जंगलकेबासियोंकेसभीजालकाटदें
फेंकेउड़ाकेआँधियाँऊँचेमचानभी
छोटेसेदिलकाऔरथाइकपाँवतीसरा
देनेकोदेदिएथेउसेदो-जहानभी
इनकीग़ज़लकाक्याकहेंजादूचराग़है
रहनेकोयेमकानहैघरकीदुकानभी
  - Deepak Qamar
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