har parinde ki baat sunta hai | हर परिंदे की बात सुनता है

  - Deepak Qamar
हरपरिंदेकीबातसुनताहै
बे-ज़बाँपेड़सबसेअच्छाहै
जिसक़दरहमनेभेदसमझाहै
कोईमंज़िलकोईरस्ताहै
इनअँधेरोंकोकिसलिएकोसें
रौशनीबनकेफूलखिलताहै
चलनेवालानिकलगयाआगे
क़ाफ़िलारास्तेमेंठहराहै
जिसकीख़ातिरहैंजागतेरहेहम
वोअभीपालनेमेंसोताहै
इनदिनोंमैंहूँतन्हातन्हासा
एकगुम-सुमख़यालरहताहै
बे-घरोंकेक़दमनहींरुकते
उनकाआँगनतमामदुनियाहै
दिलबहलताहुजूममेंरहकर
ख़ुदसेडरताहुआवोतन्हाहै
कलकीबातोंसेबे-ख़बरहमहैं
सातजन्मोंकाक्याभरोसाहै
  - Deepak Qamar
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