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Deepak Jain Deep
adhoora hi rahe har raasta tona pahunchen manzilon tak silsila to
adhoora hi rahe har raasta tona pahunchen manzilon tak silsila to | अधूरा ही रहे हर रास्ता तो
- Deepak Jain Deep
अधूरा
ही
रहे
हर
रास्ता
तो
ना
पहुँचे
मंज़िलों
तक
सिलसिला
तो
जिसे
चाहें
वही
खो
जाए
हम
से
हमारे
साथ
फिर
ऐसा
हुआ
तो
जहाँ
आवारगी
बिखरी
पड़ी
हो
मैं
उस
रस्ते
से
मंज़िल
पा
गया
तो
तुझे
पाने
में
ख़ुद
को
भूल
बैठा
तुझे
पा
कर
भी
मैं
तन्हा
रहा
तो
यक़ीं
कर
के
तिरे
पीछे
चले
हैं
नज़र
आए
ना
फिर
भी
रास्ता
तो
- Deepak Jain Deep
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तुम्हारे
पाँव
के
नीचे
कोई
ज़मीन
नहीं
कमाल
ये
है
कि
फिर
भी
तुम्हें
यक़ीन
नहीं
Dushyant Kumar
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हैं
बाशिंदे
उसी
बस्ती
के
हम
भी
सो
ख़ुद
पर
भी
भरोसा
क्यूँ
करें
हम
Jaun Elia
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यक़ीन
हो
तो
कोई
रास्ता
निकलता
है
हवा
की
ओट
भी
ले
कर
चराग़
जलता
है
Manzoor Hashmi
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बचपन
कितना
प्यारा
था
जब
दिल
को
यक़ीं
आ
जाता
था
मरते
हैं
तो
बन
जाते
हैं
आसमान
के
तारे
लोग
Azra Naqvi
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ब-जुज़
ख़ुदा
के
किसी
का
हम
पे
करम
नहीं
है
ये
कम
नहीं
है
किसी
का
सजदा
जबीं
पे
अपनी
रक़म
नहीं
है
ये
कम
नहीं
है
हमारी
चुप्पी
ये
है
ग़नीमत
वगरना
ये
जो
किया
है
तुम
ने
यक़ीन
मानो
हमारा
माथा
गरम
नहीं
है
ये
कम
नहीं
है
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Vashu Pandey
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यक़ीं
कैसे
करूँँ
वादों
पे
तेरे
साथ
रहने
के
यही
वादे
किए
होंगे
उन्होंने
भी
जो
बिछड़े
हैं
Priya Dixit
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न
कोई
वा'दा
न
कोई
यक़ीं
न
कोई
उमीद
मगर
हमें
तो
तिरा
इंतिज़ार
करना
था
Firaq Gorakhpuri
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यक़ीं
मोहकम
अमल
पैहम
मोहब्बत
फ़ातेह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी
में
हैं
ये
मर्दों
की
शमशीरें
Allama Iqbal
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तिरा
दिल
मुस्कुराएगा
दु'आ
है
हमें
भी
तो
भरोसा
है
ख़ुदा
पर
Meem Alif Shaz
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यक़ीन
कर
वो
तिरे
पास
लौट
आएगा
जब
उस
का
उठने
लगेगा
यक़ीन
लोगों
से
Varun Anand
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ऐसे
दरकिनार
हो
गए
हाशिए
के
पार
हो
गए
क्या
थी
वो
जुदाई
की
ख़बर
लफ़्ज़
तार
तार
हो
गए
बरसों
बा'द
ये
पता
चला
हम
कहीं
शिकार
हो
गए
तेरे
बा'द
क्या
बताएँ
हम
कैसे
बे-हिसार
हो
गए
इक
तिरी
सदा
ने
क्या
छुआ
दर्द
बे-क़तार
हो
गए
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Deepak Jain Deep
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खोने
का
मलाल
रह
गया
आइने
में
बाल
रह
गया
तेरे
बा'द
अपना
मश्ग़ला
ग़म
की
देख-भाल
रह
गया
तेरे
इस
हुनर
के
सामने
मेरा
सब
कमाल
रह
गया
पहले
तेरे
रंग
थे
वहाँ
मकड़ियों
का
जाल
रह
गया
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Deepak Jain Deep
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अपने
आप
को
यूँँ
समझाते
रहते
हैं
उम्मीदों
के
पर
सहलाते
रहते
है
अपने
घर
में
घर
जैसी
इक
बात
तो
है
दुख-सुख
दोनो
आते
जाते
रहते
हैं
तस्वीरों
का
शौक़
कहाँ
तक
ले
आया
परछाईं
पे
अक्स
बनाते
रहते
हैं
अपना
ज़ब्त
ना
टूटे
इस
के
ख़ातिर
हम
दीवारों
को
दर्द
सुनाते
रहते
हैं
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Deepak Jain Deep
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हवाओं
में
बिखर
जाऊँ
तुझे
छू
कर
गुज़र
जाऊँ
तक़ाज़े
मुंतज़िर
होंगे
मैं
कैसे
अपने
घर
जाऊँ
उतारूँ
क़र्ज़-ए-आईना
तुझे
देखूँ
सँवर
जाऊँ
सफ़र
है
तेरी
मर्ज़ी
पर
सदा
दे
तो
ठहर
जाऊँ
वो
अगले
मोड़
पे
घर
है
वो
मोड़
आए
तो
घर
जाऊँ
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Deepak Jain Deep
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ये
उस
की
नींद
को
क्या
हो
गया
है
मिरी
आँखों
में
शब
भर
जागता
है
यहाँ
कैसे
रहें
महफ़ूज़
चेहरे
यहाँ
टूटा
हुआ
हर
आइना
है
यक़ीं
इस
बात
का
अब
तक
नहीं
है
कि
मेरी
प्यास
से
दरिया
बड़ा
है
दिमाग़-ओ-दिल
हैं
पहरे-दार
जैसे
जो
इक
सोए
तो
दूजा
जागता
है
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Deepak Jain Deep
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