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Deepak Jain Deep
aise darkinaar ho ga.e
aise darkinaar ho ga.e | ऐसे दरकिनार हो गए
- Deepak Jain Deep
ऐसे
दरकिनार
हो
गए
हाशिए
के
पार
हो
गए
क्या
थी
वो
जुदाई
की
ख़बर
लफ़्ज़
तार
तार
हो
गए
बरसों
बा'द
ये
पता
चला
हम
कहीं
शिकार
हो
गए
तेरे
बा'द
क्या
बताएँ
हम
कैसे
बे-हिसार
हो
गए
इक
तिरी
सदा
ने
क्या
छुआ
दर्द
बे-क़तार
हो
गए
- Deepak Jain Deep
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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तुम्हारी
याद
के
जब
ज़ख़्म
भरने
लगते
हैं
किसी
बहाने
तुम्हें
याद
करने
लगते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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मुँह
ज़र्द-ओ-आह-ए-सर्द
ओ
लब-ए-ख़ुश्क
ओ
चश्म-ए-तर
सच्ची
जो
दिल-लगी
है
तो
क्या
क्या
गवाह
है
Nazeer Akbarabadi
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हर
एक
सितम
पे
दाद
दी
हर
ज़ख़्म
पे
दु'आ
हमने
भी
दुश्मनों
को
सताया
बहुत
दिनों
Nawaz Deobandi
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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ज़ख़्म
कहते
हैं
दिल
का
गहना
है
दर्द
दिल
का
लिबास
होता
है
Gulzar
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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तुम्हारे
बाद
ये
दुख
भी
तो
सहना
पड़
रहा
है
किसी
के
साथ
मजबूरी
में
रहना
पड़
रहा
है
Ali Zaryoun
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रात
भर
दर्द
की
शम्अ
जलती
रही
ग़म
की
लौ
थरथराती
रही
रात
भर
Makhdoom Mohiuddin
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ये
उस
की
नींद
को
क्या
हो
गया
है
मिरी
आँखों
में
शब
भर
जागता
है
यहाँ
कैसे
रहें
महफ़ूज़
चेहरे
यहाँ
टूटा
हुआ
हर
आइना
है
यक़ीं
इस
बात
का
अब
तक
नहीं
है
कि
मेरी
प्यास
से
दरिया
बड़ा
है
दिमाग़-ओ-दिल
हैं
पहरे-दार
जैसे
जो
इक
सोए
तो
दूजा
जागता
है
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Deepak Jain Deep
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अधूरा
ही
रहे
हर
रास्ता
तो
ना
पहुँचे
मंज़िलों
तक
सिलसिला
तो
जिसे
चाहें
वही
खो
जाए
हम
से
हमारे
साथ
फिर
ऐसा
हुआ
तो
जहाँ
आवारगी
बिखरी
पड़ी
हो
मैं
उस
रस्ते
से
मंज़िल
पा
गया
तो
तुझे
पाने
में
ख़ुद
को
भूल
बैठा
तुझे
पा
कर
भी
मैं
तन्हा
रहा
तो
यक़ीं
कर
के
तिरे
पीछे
चले
हैं
नज़र
आए
ना
फिर
भी
रास्ता
तो
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Deepak Jain Deep
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खोने
का
मलाल
रह
गया
आइने
में
बाल
रह
गया
तेरे
बा'द
अपना
मश्ग़ला
ग़म
की
देख-भाल
रह
गया
तेरे
इस
हुनर
के
सामने
मेरा
सब
कमाल
रह
गया
पहले
तेरे
रंग
थे
वहाँ
मकड़ियों
का
जाल
रह
गया
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Deepak Jain Deep
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तेरे
दर
तक
आऊँ
मैं
आईना
हो
जाऊँ
मैं
मंज़िल
अपनी
ढूँडे
वो
और
रस्ता
हो
जाऊँ
मैं
उस
का
कोई
ज़िक्र
ना
हो
और
रुस्वा
हो
जाऊँ
मैं
सब
के
दा'वे
वाजिब
हैं
किस
के
हिस्से
आऊँ
मैं
तन्हाई
को
साथ
लिए
भीड़
नहीं
हो
जाऊँ
मैं
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Deepak Jain Deep
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हवाओं
में
बिखर
जाऊँ
तुझे
छू
कर
गुज़र
जाऊँ
तक़ाज़े
मुंतज़िर
होंगे
मैं
कैसे
अपने
घर
जाऊँ
उतारूँ
क़र्ज़-ए-आईना
तुझे
देखूँ
सँवर
जाऊँ
सफ़र
है
तेरी
मर्ज़ी
पर
सदा
दे
तो
ठहर
जाऊँ
वो
अगले
मोड़
पे
घर
है
वो
मोड़
आए
तो
घर
जाऊँ
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Deepak Jain Deep
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