nigaah-e-mast-e-saaqi ka salaam aaya to kya hogaa | निगाह-ए-मस्त-ए-साक़ी का सलाम आया तो क्या होगा

  - Darshan Singh
निगाह-ए-मस्त-ए-साक़ीकासलामआयातोक्याहोगा
अगरफिरतर्क-ए-तौबाकापयामआयातोक्याहोगा
हरमवालेतोपूछेंगेबतातूकिसकाबंदाहै
ख़ुदासपहलेलबपरउनकानामआयातोक्याहोगा
मुझेमंज़ूरउनसेमैंबोलूँगामगरनासेह
अगरउनकीनिगाहोंकासलामआयातोक्याहोगा
चलाहैआदमीतसख़ीर-ए-मेहर-ओ-माहकीख़ातिर
मगरसय्यादहीख़ुदज़ेर-ए-दामआयातोक्याहोगा
मुझेतर्क-ए-तलबमंज़ूरलेकिनयेतोबतलादो
कोईख़ुदहीलिएहाथोंमेंजामआयातोक्याहोगा
मोहब्बतकेलिएतर्क-ए-तअ'ल्लुक़हीज़रूरीहो
मोहब्बतमेंअगरऐसामक़ामआयातोक्याहोगा
जहाँकुछख़ासलोगोंपरनिगाह-ए-लुत्फ़है'दर्शन'
अगरउसबज़्ममेंदौर-ए-अवामआयातोक्याहोगा
  - Darshan Singh
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