bahut mushkil hai tark-e-aarzoo rabt-aashna ho kar | बहुत मुश्किल है तर्क-ए-आरज़ू रब्त-आश्ना हो कर

  - Darshan Singh
बहुतमुश्किलहैतर्क-ए-आरज़ूरब्त-आश्नाहोकर
गुज़रजावादी-ए-पुर-ख़ारसेबाद-ए-सबाहोकर
लगादोगेतमन्नाकेसफ़ीनेकोकिनारेसे
मआ'ज़-अल्लाहदावा-ए-ख़ुदाईना-ख़ुदाहोकर
हरइकहोसिलसिलारंगींगुनाहोंकेसलासिलका
नहींआसानदुनियासेगुज़रनापारसाहोकर
मिरीपिन्हाई-ए-इल्म-ओ-ख़बरकीइंतिहायेहै
किइकक़तरेसेना-वाक़िफ़हूँदरिया-आश्नाहोकर
कहाँताब-ए-जुदाईअबतोयेमहसूसहोताहै
किमैंख़ुदसेजुदाहोजाऊँगातुमसेजुदाहोकर
तिरादरछोड़दूँलेकिनतिरेदरकेसिवासाक़ी
कहाँजाऊँकिधरजाऊँज़मानेसेख़फ़ाहोकर
जोशिकवाउनसेकरनाथावोउनकेरू-ब-रू'दर्शन'
ज़बाँतकआतेआतेरहगयाहर्फ़-ए-दुआहोकर
  - Darshan Singh
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