libaas-e-faqr men ham ko jo khaaksaar mile | लिबास-ए-फ़क़्र में हम को जो ख़ाकसार मिले

  - Darshan Singh
लिबास-ए-फ़क़्रमेंहमकोजोख़ाकसारमिले
उन्हींकेदरपेसलातीन-ए-रोज़गारमिले
वोराज़जिससेसुलगतारहाहैदिलकहदें
हमारेदिलसाअगरकोईराज़दारमिले
शराबख़ाना-ए-चिश्तीमेंभीनज़रआए
हमेंजोउलफ़्त-ए-नानककेबादा-ख़्वारमिले
ग़म-ए-जहाँ-निगरीकासफ़र-ए-क़यामतथा
हरएकज़र्रेकेसीनेमेंकोहसारमिले
कोईभीदूरी-ए-मंज़िलनहींअगर'दर्शन'
जहाँकोमेराजुनून-ए-ख़िरद-शिकारमिले
  - Darshan Singh
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