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Brajnabh Pandey
jaan kyun tu mujhko ghaayal kar raha hai
jaan kyun tu mujhko ghaayal kar raha hai | जान क्यूँँ तू मुझको घाइल कर रहा है
- Brajnabh Pandey
जान
क्यूँँ
तू
मुझको
घाइल
कर
रहा
है
दिल
भी
मुझ
सेे
यार
दंगल
कर
रहा
है
क्या
बताऊँ
खलबली
दिल
में
मची
है
मुझको
तेरा
हुस्न
पागल
कर
रहा
है
ज़िंदगी
मेरी
तो
बंजर
हो
गई
है
पर
ये
तेरा
प्यार
बादल
कर
रहा
है
दश्त
का
माहौल
सा
था
तू
जो
बिछड़ा
फिर
तू
आ
कर
मुझ
को
जंगल
कर
रहा
है
- Brajnabh Pandey
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ख़ुद
हुस्न
से
न
पूछिए
ता'रीफ़
हुस्न
की
दीवाने
से
ये
पूछिए
दीवाना
क्यूँँ
हुआ
Aamir Azher
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वो
सच्चाई
की
मूरत
भी
नहीं
थी
उसे
मेरी
ज़रूरत
भी
नहीं
थी
मैं
जिस
शिद्दत
से
उसको
चाहता
था
वो
उतनी
ख़ूब-सूरत
भी
नहीं
थी
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Tanveer Ghazi
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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मन
के
हारे
हुए
इंसान
को
हुस्न-ए-शय
से
कोई
मतलब
नहीं
कोई
भी
सरोकार
नहीं
shaan manral
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और
भी
दुनिया
में
मंज़र
ख़ूब-सूरत
हैं
मगर
तेरी
ज़ुल्फ़ों
झटकने
से
सुहाना
कुछ
नहीं
Alankrat Srivastava
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जल्वा-ए-नूर
है
ये
दोनो
आँखें
उसकी
उसको
जलता
सा
शोला
जो
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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बोसा
जो
तलब
मैं
ने
किया
हँस
के
वो
बोले
ये
हुस्न
की
दौलत
है
लुटाई
नहीं
जाती
Unknown
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न
पूछो
हुस्न
की
ता'रीफ़
हम
से
मोहब्बत
जिस
से
हो
बस
वो
हसीं
है
Adil Farooqui
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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मुझको
भाती
है
उदासी
मत
हँसाओ
रहने
भी
दो
Brajnabh Pandey
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ब्रज
तुझको
वो
चेहरा
भूल
जाना
है
इक
दिन
ब्रज
रोज़
तू
उसको
याद
क्यूँ
नहीं
करता
Brajnabh Pandey
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उम्र
सारी
गुज़ार
दी
मैंने
मौत
के
इंतिज़ार
में
यारों
Brajnabh Pandey
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उसको
समझने
में
बड़े
मन
से
जुटा
हूँ
यार
मैं
मैं
हूँ
वही
जो
आज
तक
समझा
नहीं
ख़ुद
को
कभी
Brajnabh Pandey
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गुफ़्तुगू
जो
तू
यूँँ
नहीं
करता
मुझको
आबाद
क्यूँँ
नहीं
करता
जो
हुआ
है
ये
इश्क़
है
तो
फिर
मुझको
बर्बाद
क्यूँँ
नहीं
करता
बोलते
है
यहाँ
सभी
मुझ
सेे
पर
कोई
बात
क्यूँँ
नहीं
करता
क्यूँँ
तू
झुकता
है
उसके
आगे
यार
उस
से
दो
हाथ
क्यूँँ
नहीं
करता
मुझको
भी
डाँट
देता
है
वो
शख़्स
उसके
आगे
मैं
चूँ
नहीं
करता
मुझको
अपना
कहे
है
तू
तो
फिर
मेरे
घर
आ
जा
क्यूँँ
नहीं
करता
गाँव
के
लड़कों
जैसी
बदमाशी
शहर
का
लड़का
क्यूँँ
नहीं
करता
धोखे
जो
खाता
है
तू
इतने
यार
प्यार
तू
माँ
से
क्यूँँ
नहीं
करता
बोलता
है
यहाँ
सभी
से
वो
मुझ
सेे
फिर
बात
क्यूँँ
नहीं
करता
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Brajnabh Pandey
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