shamsher-e-barhana maang ghazab baalon ki mahak phir waisi hi | शमशीर-ए-बरहना माँग ग़ज़ब बालों की महक फिर वैसी ही

  - Bahadur Shah Zafar
शमशीर-ए-बरहनामाँगग़ज़बबालोंकीमहकफिरवैसीही
जूड़ेकीगुंधावटक़हर-ए-ख़ुदाबालोंकीमहकफिरवैसीही
आँखेंहैंकटोरासीवोसितमगर्दनहैसुराही-दारग़ज़ब
औरउसीमेंशराब-ए-सुर्ख़ी-ए-पाँरखतीहैझलकफिरवैसीही
हरबातमेंउसकीगर्मीहैहरनाज़मेंउसकेशोख़ीहै
क़ामतहैक़यामतचालपरीचलनेमेंफड़कफिरवैसीही
गररंगभबूकाआतिशहैऔरबीनीशोला-ए-सरकशहै
तोबिजलीसीकौंदेहैपरीआरिज़कीचमकफिरवैसीही
नौ-ख़ेज़कुचेंदोग़ुंचाहैंहैनर्मशिकमइकख़िर्मन-ए-गुल
बारीककमरजोशाख़-ए-गुलरखतीहैलचकफिरवैसीही
हैनाफ़कोईगिर्दाब-ए-बलाऔरगोलसुरींरानेंहैंसफ़ा
हैसाक़बिलोरींशम-ए-ज़ियापाँवकीकफ़कफिरवैसीही
महरमहैहबाब-ए-आब-ए-रवाँसूरजकीकिरनहैउसपेलिपट
जालीकीकुर्तीहैवोबलागोटेकीधनकफिरवैसीही
वोगाएतोआफ़तलाएहैहरतालमेंलेवेजाननिकाल
नाचउसकाउठाएसौफ़ित्नेघुँगरूकीझनकफिरवैसीही
हरबातपेहमसेवोजो'ज़फ़र'करताहैलगावटमुद्दतसे
औरउसकीचाहतरखतेहैंहमआजतलकफिरवैसीही
  - Bahadur Shah Zafar
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