qadmon se itnaa door kinaara kabhi na tha | क़दमों से इतना दूर किनारा कभी न था

  - Badr-e-Alam Khalish
क़दमोंसेइतनादूरकिनाराकभीथा
ना-क़ाबिल-ए-उबूरयेदरियाकभीथा
तुमसाहसींइनआँखोंनेदेखाकभीथा
लेकिनयेसचनहींकोईतुमसाकभीथा
हैज़िक्र-ए-यारक्यूँँशब-ए-ज़िंदाँसेदूरदूर
हम-नशींयेतर्ज़ग़ज़लकाकभीथा
कमरेमेंदिलकेउसकेअलावाकोईनहीं
हैरानहूँकिऐसाअँधेराकभीथा
किसनेबिसात-ए-बहसकेमोहरेबदलदिए
तन्हातोथावोपहलेभीगूँगाकभीथा
इमरोज़-ए-इंतिज़ारकाफ़र्दातोकलभीहै
अंदोह-ए-इमशबीकासवेराकभीथा
हरज़ेहनमेंहमेशासुलगताहैयेसवाल
आख़िरहुआवोक्यूँँजिसेहोनाकभीथा
दीवानाथाभटकगयागुमहोगयाहैक़ैस
ख़ालीमगरकजावा-ए-लैलाकभीथा
कलभीइसीदयारमेंथारौशनीकाक़हत
ऐसामगरचराग़काधंदाकभीथा
पिघलीकुछऔरबर्फ़तोइकऔरशहर-ए-ख़्वाब
यूँँबहगयानशेबमेंगोयाकभीथा
बरसाहैकिसबबूलपेअब्र-ए-बहार-ख़ेज़
इतनाहरातोज़ख़्म-ए-तमन्नाकभीथा
उसनेभीइल्तिफ़ातसेदेखाथाकब'ख़लिश'
मैंनेभीउसकेबारेमेंसोचाकभीथा
  - Badr-e-Alam Khalish
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