दास्तान-ए-ग़मतुझेबतलाएँक्या
ज़ख़्मसीनेकेतुझेदिखलाएँक्या
सोचतेहैंभूलजाएँसरज़निश
मुद्दतोंकीबातअबजतलाएँक्या
लोगउसकीबाततोसुनतेनहीं
ख़िज़्रकोजंगलसेहमबुलवाएँक्या
रोज़तुमव'अदानयालेलेतेहो
पासइनवादोंकाहमरखपाएँक्या
मुफ़्लिसीनेजा-ब-जालूटाहमें
अबबचाकुछभीनहींलुटवाएँक्या