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Anurag Ravi
insaan naam ki ek kahaanii men
insaan naam ki ek kahaanii men | इंसान नाम की एक कहानी में
- Anurag Ravi
इंसान
नाम
की
एक
कहानी
में
हमें
कई
किरदार
दिखाई
दिए
- Anurag Ravi
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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रंग
और
नस्ल
ज़ात
और
मज़हब
जो
भी
है
आदमी
से
कमतर
है
इस
हक़ीक़त
को
तुम
भी
मेरी
तरह
मान
जाओ
तो
कोई
बात
बने
Sahir Ludhianvi
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देखें
क़रीब
से
भी
तो
अच्छा
दिखाई
दे
इक
आदमी
तो
शहर
में
ऐसा
दिखाई
दे
Zafar Gorakhpuri
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अब
जो
पत्थर
है
आदमी
था
कभी
इस
को
कहते
हैं
इंतिज़ार
मियाँ
Afzal Khan
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ऐ
आसमान
तेरे
ख़ुदा
का
नहीं
है
ख़ौफ़
डरते
हैं
ऐ
ज़मीन
तेरे
आदमी
से
हम
Unknown
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आने
वाले
जाने
वाले
हर
ज़माने
के
लिए
आदमी
मज़दूर
है
राहें
बनाने
के
लिए
Hafeez Jalandhari
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इक
आदमी
जो
घर
पे
कभी
हँसता
ही
नहीं
पकड़ा
गया
है
हँसता
हुआ
कैमरे
के
साथ
Shadab khan
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वो
मुझ
को
छोड़
के
जिस
आदमी
के
पास
गया
बराबरी
का
भी
होता
तो
सब्र
आ
जाता
Parveen Shakir
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आदमी
देश
छोड़े
तो
छोड़े
'अली'
दिल
में
बसता
हुआ
घर
नहीं
छोड़ता
एक
मैं
हूँ
कि
नींदें
नहीं
आ
रही
एक
तू
है
कि
बिस्तर
नहीं
छोड़ता
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Ali Zaryoun
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तुम्हारी
ज़िंदगी
में
तुम
हमेशा
मुझे
हर
आदमी
में
सुन
सकोगी
सुनोगी
जब
कभी
भी
शे'र
मेरे
तो
ख़ुद
को
शा'इरी
में
सुन
सकोगी
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Sanskar 'Sanam'
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वक़्त
कोई
और
दिखा
रहा
है
और
हम
घड़ी
देखे
जा
रहे
हैं
Anurag Ravi
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वो
यहाँ
पर
आए
शायद
रुत
ये
बदल
जाए
शायद
गली
में
मेरा
नाम
पुकारो
वो
खिड़की
में
आए
शायद
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Anurag Ravi
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जो
मौसम
हमें
रास
आते
हैं
जल्दी
से
क्यूँ
बदल
जाते
हैं
तब
ही
हार
जाता
है
दुश्मन
हम
जब
जब
मुस्कुराते
हैं
वो
है
पुराने
गाने
कि
धुन
हर
शाम
उसे
गुनगुनाते
हैं
रिश्ते
निभाते
कहाँ
हैं
लोग
लोग
सिर्फ़
रिश्ते
बनाते
हैं
जहाँ
लगी
थी
तस्वीर
हमारी
नयन
वहीं
पर
ठहर
जाते
हैं
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Anurag Ravi
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हम
उस
नस्ल
के
परिंदे
नहीं
है
जो
कहें
आ
समाँ
कि
ऊंचाई
बहुत
है
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Anurag Ravi
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पेड़
हिफ़ाजत
करना
चाहते
हैं
और
परिंदे
हैं,
उड़ना
चाहते
हैं
ना
मानों
हमारी
बात
यूँँ
ही
हम
तुम
सेे
उलझना
चाहते
हैं
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Anurag Ravi
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