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Anurag Ravi
ham us nasl ke parinde nahin hai
ham us nasl ke parinde nahin hai | हम उस नस्ल के परिंदे नहीं है
- Anurag Ravi
हम
उस
नस्ल
के
परिंदे
नहीं
है
जो
कहें
आ
समाँ
कि
ऊंचाई
बहुत
है
- Anurag Ravi
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मेरी
हर
गुफ़्तगू
ज़मीं
से
रही
यूँँ
तो
फ़ुर्सत
में
आसमान
भी
था
Madan Mohan Danish
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शब-ए-विसाल
बहुत
कम
है
आसमाँ
से
कहो
कि
जोड़
दे
कोई
टुकड़ा
शब-ए-जुदाई
का
Ameer Minai
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पहले
सर
की
ये
शिकायत
थी
फ़लक
ऊँचा
है
अब
मिरे
पाँव
ये
कहते
हैं
कि
धरती
है
कहाँ
Rauf Raza
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देख
कैसे
धुल
गए
है
गिर्या-ओ-ज़ारी
के
बाद
आसमाँ
बारिश
के
बाद
और
मैं
अज़ादारी
के
बाद
इस
सेे
बढ़
कर
तो
तुझे
कोई
हुनर
आता
नहीं
सोचता
हूँ
क्या
करेगा
दिल
आज़ारी
के
बाद
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Abbas Tabish
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ये
आसमाँ
में
कोई
बुत
बैठा
भी
है
कि
नईं
या
हम
ज़मीं
के
लोग
यूँँ
ही
चीखते
हैं
बस
Siddharth Saaz
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ऐ
आसमान
तेरी
इनायत
बजा
मगर
फ़स्लें
पकी
हुई
हों
तो
बारिश
फ़ुज़ूल
है
Shahid Zaki
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वक़्त
आने
दे
दिखा
देंगे
तुझे
ऐ
आसमाँ
हम
अभी
से
क्यूँँ
बताएँ
क्या
हमारे
दिल
में
है
Bismil Azimabadi
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आसमाँ
से
गरज
छेड़ती
है
हमें
एक
बारिश
में
भी
भीगे
थे
साथ
हम
Parul Singh "Noor"
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मेरे
हुजरे
में
नहीं
और
कहीं
पर
रख
दो
आसमाँ
लाए
हो
ले
आओ
ज़मीं
पर
रख
दो
Rahat Indori
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आसमाँ
ने
बंद
कर
लीं
खिड़कियाँ
अब
ज़मीं
में
उसकी
दिलचस्पी
नहीं
Rajesh Reddy
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इंसान
नाम
की
एक
कहानी
में
हमें
कई
किरदार
दिखाई
दिए
Anurag Ravi
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जो
मौसम
हमें
रास
आते
हैं
जल्दी
से
क्यूँ
बदल
जाते
हैं
तब
ही
हार
जाता
है
दुश्मन
हम
जब
जब
मुस्कुराते
हैं
वो
है
पुराने
गाने
कि
धुन
हर
शाम
उसे
गुनगुनाते
हैं
रिश्ते
निभाते
कहाँ
हैं
लोग
लोग
सिर्फ़
रिश्ते
बनाते
हैं
जहाँ
लगी
थी
तस्वीर
हमारी
नयन
वहीं
पर
ठहर
जाते
हैं
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Anurag Ravi
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माँ
बाप
के
आँसुओं
की
वजह
क्या
जाने
जो
बेटा
छुट्टियों
में
भी
घर
नहीं
आता
Anurag Ravi
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बड़ी
तेज़ी
से
पल
जाएगा
सब
हाथों
से
निकल
जाएगा
जलता
घर
अब
कौन
बचाए
सभी
का
हाथ
जल
जाएगा
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Anurag Ravi
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वो
यहाँ
पर
आए
शायद
रुत
ये
बदल
जाए
शायद
गली
में
मेरा
नाम
पुकारो
वो
खिड़की
में
आए
शायद
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Anurag Ravi
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