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Anurag Ravi
vo yahaañ par aa.e shaayad
vo yahaañ par aa.e shaayad | वो यहाँ पर आए शायद
- Anurag Ravi
वो
यहाँ
पर
आए
शायद
रुत
ये
बदल
जाए
शायद
गली
में
मेरा
नाम
पुकारो
वो
खिड़की
में
आए
शायद
- Anurag Ravi
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'इंशा'-जी
उठो
अब
कूच
करो
इस
शहर
में
जी
को
लगाना
क्या
वहशी
को
सुकूँ
से
क्या
मतलब
जोगी
का
नगर
में
ठिकाना
क्या
Ibn E Insha
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मुझ
को
कहानियाँ
न
सुना
शहर
को
बचा
बातों
से
मेरा
दिल
न
लुभा
शहर
को
बचा
Taimur Hasan
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भूला
नहीं
हूँ
आज
भी
हालात
गाँव
के
हाँ,
शहर
आ
गया
हूँ
मगर
साथ
गाँव
के
दुनिया
में
मेरा
नाम
जो
रोशन
हुआ
अगर
जलने
लगेंगे
बल्ब
भी
हर
रात
गाँव
के
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Tanoj Dadhich
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'अल्वी'
ये
मो'जिज़ा
है
दिसम्बर
की
धूप
का
सारे
मकान
शहर
के
धोए
हुए
से
हैं
Mohammad Alvi
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सदियों
से
किनारे
पे
खड़ा
सूख
रहा
है
इस
शहर
को
दरिया
में
गिरा
देना
चाहिए
Mohammad Alvi
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दूर
साए
से
मेरे
कहीं
रहती
हो
या'नी
इस
शहर
में
अब
नहीं
रहती
हो
लौट
आया
हूँ
इक
दोस्त
के
घर
से
मैं
जब
ये
देखा
कि
तुम
भी
वहीं
रहती
हो
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Dileep Kumar
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शहर
गुम-सुम
रास्ते
सुनसान
घर
ख़ामोश
हैं
क्या
बला
उतरी
है
क्यूँँ
दीवार-ओ-दर
ख़ामोश
हैं
Azhar Naqvi
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नहीं
हो
तुम
तो
ऐसा
लग
रहा
है
कि
जैसे
शहर
में
कर्फ़्यूँँ
लगा
है
Fahmi Badayuni
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जो
सुनते
हैं
कि
तिरे
शहर
में
दसहरा
है
हम
अपने
घर
में
दिवाली
सजाने
लगते
हैं
Jamuna Parsad Rahi
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इस
शहर
में
जीने
के
अंदाज़
निराले
हैं
होंटों
पे
लतीफ़े
हैं
आवाज़
में
छाले
हैं
Javed Akhtar
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माँ
बाप
के
आँसुओं
की
वजह
क्या
जाने
जो
बेटा
छुट्टियों
में
भी
घर
नहीं
आता
Anurag Ravi
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गुनहगार
तो
पहुंच
से
बहुत
दूर
थे
सज़ा
उन्हें
मिली
जो
बेकुसूर
थे
Anurag Ravi
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हमें
सच्चाई
तक
नहीं
पहुंचना
बहुत
गहराई
तक
नहीं
पहुंचना
जहाँ
से
आदमी
आदमी
ना
दिखे
ऐसी
ऊंचाई
तक
नहीं
पहुंचना
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Anurag Ravi
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जब
देर
से
घर
आया
वो
तब
नज़रों
पर
आया
वो
मुशायरा
मुझे
भी
पढ़ना
था
इसलिए
सज
कर
आया
वो
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Anurag Ravi
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मैंने
उसे
माफ
कर
दिया
और
कितनी
सज़ा
दूँ
उसको
Anurag Ravi
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