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Anurag Ravi
ha
ha | हमें सच्चाई तक नहीं पहुंचना
- Anurag Ravi
हमें
सच्चाई
तक
नहीं
पहुंचना
बहुत
गहराई
तक
नहीं
पहुंचना
जहाँ
से
आदमी
आदमी
ना
दिखे
ऐसी
ऊंचाई
तक
नहीं
पहुंचना
- Anurag Ravi
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बस-कि
दुश्वार
है
हर
काम
का
आसाँ
होना
आदमी
को
भी
मुयस्सर
नहीं
इंसाँ
होना
Mirza Ghalib
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लोग
टूट
जाते
हैं
एक
घर
बनाने
में
तुम
तरस
नहीं
खाते
बस्तियाँ
जलाने
में
Bashir Badr
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इंसाँ
की
ख़्वाहिशों
की
कोई
इंतिहा
नहीं
दो
गज़
ज़मीं
भी
चाहिए
दो
गज़
कफ़न
के
बाद
Kaifi Azmi
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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मोहब्बत
एक
ख़ुशबू
है
हमेशा
साथ
चलती
है
कोई
इंसान
तन्हाई
में
भी
तन्हा
नहीं
रहता
Bashir Badr
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मैं
चीख़ता
रहा
कुछ
और
भी
है
मेरा
इलाज
मगर
ये
लोग
तुम्हारा
ही
नाम
लेते
रहे
Anjum Saleemi
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उसको
जो
कुछ
भी
कहूँ
अच्छा
बुरा
कुछ
न
करे
यार
मेरा
है
मगर
काम
मेरा
कुछ
न
करे
दूसरी
बार
भी
पड़
जाए
अगर
कुछ
करना
आदमी
पहली
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
न
करे
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Abid Malik
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अपनी
हस्ती
का
भी
इंसान
को
इरफ़ांन
हुआ
ख़ाक
फिर
ख़ाक
थी
औक़ात
से
आगे
न
बढ़ी
Shakeel Badayuni
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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इंसान
नाम
की
एक
कहानी
में
हमें
कई
किरदार
दिखाई
दिए
Anurag Ravi
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जो
मौसम
हमें
रास
आते
हैं
जल्दी
से
क्यूँ
बदल
जाते
हैं
तब
ही
हार
जाता
है
दुश्मन
हम
जब
जब
मुस्कुराते
हैं
वो
है
पुराने
गाने
कि
धुन
हर
शाम
उसे
गुनगुनाते
हैं
रिश्ते
निभाते
कहाँ
हैं
लोग
लोग
सिर्फ़
रिश्ते
बनाते
हैं
जहाँ
लगी
थी
तस्वीर
हमारी
नयन
वहीं
पर
ठहर
जाते
हैं
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Anurag Ravi
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किताब
सी
कोई
लड़की
मिल
जाए
मैं
पढ़ने
लिखने
वाला
लड़का
हूँ
Anurag Ravi
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मैंने
उसे
माफ
कर
दिया
और
कितनी
सज़ा
दूँ
उसको
Anurag Ravi
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जब
लोग
बैठे
थे
पानी
कि
आस
में
हम
मुत्मइन
थे
तब
अपनी
प्यास
में
सजे
सवरें
लोग
फीके
लगने
लगे
आ
गया
वो
जब
सादे
लिबास
में
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Anurag Ravi
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