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Anurag Ravi
jo mausam ha
jo mausam ha | जो मौसम हमें रास आते हैं
- Anurag Ravi
जो
मौसम
हमें
रास
आते
हैं
जल्दी
से
क्यूँ
बदल
जाते
हैं
तब
ही
हार
जाता
है
दुश्मन
हम
जब
जब
मुस्कुराते
हैं
वो
है
पुराने
गाने
कि
धुन
हर
शाम
उसे
गुनगुनाते
हैं
रिश्ते
निभाते
कहाँ
हैं
लोग
लोग
सिर्फ़
रिश्ते
बनाते
हैं
जहाँ
लगी
थी
तस्वीर
हमारी
नयन
वहीं
पर
ठहर
जाते
हैं
- Anurag Ravi
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इस
आ
समाँ
को
मुझ
सेे
है
क्या
दुश्मनी
"अली"?
भेजूं
अगर
दु'आ
भी
तो
सर
पर
लगे
मुझे
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Ali Rumi
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लुत्फ़
आता
है
बहुत
सोच
के
मुझको
कि
रक़ीब
रंगत-ए-लब
को
तेरी
पान
समझते
होंगे
Ameer Imam
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रंग
बदला
यार
ने
वो
प्यार
की
बातें
गईं
वो
मुलाक़ातें
गईं
वो
चाँदनी
रातें
गईं
Hafeez Jalandhari
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मुझ
से
नफ़रत
है
अगर
उस
को
तो
इज़हार
करे
कब
मैं
कहता
हूँ
मुझे
प्यार
ही
करता
जाए
Iftikhar Naseem
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ज़रा
मौसम
तो
बदला
है
मगर
पेड़ों
की
शाख़ों
पर
नए
पत्तों
के
आने
में
अभी
कुछ
दिन
लगेंगे
बहुत
से
ज़र्द
चेहरों
पर
ग़ुबार-ए-ग़म
है
कम
बे-शक
पर
उन
को
मुस्कुराने
में
अभी
कुछ
दिन
लगेंगे
Javed Akhtar
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भुला
दो
रंग
नफ़रत
के
,
तिरंगा
हाथ
में
लेकर
दिखा
दो
तीन
रंगों
का
सभी
को
प्यार
होली
में
Vijay Anand Mahir
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सूरज
से
जंग
जीतने
निकले
थे
बेवक़ूफ़
सारे
सिपाही
मोम
के
थे
घुल
के
आ
गए
Rahat Indori
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हम
अपनी
जान
के
दुश्मन
को
अपनी
जान
कहते
हैं
मोहब्बत
की
इसी
मिट्टी
को
हिंदुस्तान
कहते
हैं
Rahat Indori
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वो
जंग
जिस
में
मुक़ाबिल
रहे
ज़मीर
मिरा
मुझे
वो
जीत
भी
'अंबर'
न
होगी
हार
से
कम
Ambreen Haseeb Ambar
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इश्क़
तू
ने
बड़ा
नुक़सान
किया
है
मेरा
मैं
तो
उस
शख़्स
से
नफ़रत
भी
नहीं
कर
सकता
Liaqat Jafri
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माँ
बाप
के
आँसुओं
की
वजह
क्या
जाने
जो
बेटा
छुट्टियों
में
भी
घर
नहीं
आता
Anurag Ravi
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पेड़
हिफ़ाजत
करना
चाहते
हैं
और
परिंदे
हैं,
उड़ना
चाहते
हैं
ना
मानों
हमारी
बात
यूँँ
ही
हम
तुम
सेे
उलझना
चाहते
हैं
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Anurag Ravi
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वो
यहाँ
पर
आए
शायद
रुत
ये
बदल
जाए
शायद
गली
में
मेरा
नाम
पुकारो
वो
खिड़की
में
आए
शायद
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Anurag Ravi
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गुनहगार
तो
पहुंच
से
बहुत
दूर
थे
सज़ा
उन्हें
मिली
जो
बेकुसूर
थे
Anurag Ravi
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जब
देर
से
घर
आया
वो
तब
नज़रों
पर
आया
वो
मुशायरा
मुझे
भी
पढ़ना
था
इसलिए
सज
कर
आया
वो
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Anurag Ravi
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