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Jamuna Parsad Rahi
jo sunte hain ki tire shahar men dasahra hai
jo sunte hain ki tire shahar men dasahra hai | जो सुनते हैं कि तिरे शहर में दसहरा है
- Jamuna Parsad Rahi
जो
सुनते
हैं
कि
तिरे
शहर
में
दसहरा
है
हम
अपने
घर
में
दिवाली
सजाने
लगते
हैं
- Jamuna Parsad Rahi
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हर
इक
मकाँ
में
जला
फिर
दिया
दिवाली
का
हर
इक
तरफ़
को
उजाला
हुआ
दिवाली
का
Nazeer Akbarabadi
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जो
न
खेली
होली
'अमृत'
के
साथ
में
हाथों
में
दीवाली
तक
गुलाल
रहेगा
Amritanshu Sharma
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मिल
के
होती
थी
कभी
ईद
भी
दीवाली
भी
अब
ये
हालत
है
कि
डर
डर
के
गले
मिलते
हैं
Unknown
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तमन्ना
है
दिवाली
में
दिया
इक
जल
उठे
ऐसा
जला
दे
फ़ासले
सारे
हमारे
दरमियाँ
जो
हैं
Bhoomi Srivastava
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मैं
चाहता
हूँ
इक
मुसलमां
दोस्त
हो
मेरा
मेरे
मकाँ
में
ईद
हो
उसके
दिवाली
हो
Siddharth Saaz
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रात
की
भीगी-भीगी
मिट्टी
से
कुछ
उजाले
उगा
रही
होगी
मेरी
दुनिया
में
करके
अँधियारा
वो
दिवाली
मना
रही
होगी
Tanveer Ghazi
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आज
की
रात
दिवाली
है
दिए
रौशन
हैं
आज
की
रात
ये
लगता
है
मैं
सो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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वो
दिन
भी
हाए
क्या
दिन
थे
जब
अपना
भी
त'अल्लुक़
था
दशहरे
से
दिवाली
से
बसंतों
से
बहारों
से
Kaif Bhopali
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हमारे
लोग
अगर
रास्ता
न
पाएँगे
शिलाएँ
जोड़
के
पानी
पे
पुल
बनाएँगे
फिर
एक
बार
मनेगी
अवध
में
दीवाली
फिर
एक
बार
सभी
रौशनी
में
आएँगे
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Amit Jha Rahi
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मुझ
को
ख़्वाहिश
है
उसी
शान
की
दिवाली
की
लक्ष्मी
देश
में
उल्फ़त
की
शब-ओ-रोज़
रहे
देश
को
प्यार
से
मेहनत
से
सँवारें
मिल
कर
अहल-ए-भारत
के
दिलों
में
ये
'कँवल'
सोज़
रहे
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Kanval Dibaivi
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