hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
anupam shah
ye mumkin hai nahin tum bheeg paao abki saawan men
ye mumkin hai nahin tum bheeg paao abki saawan men | ये मुमकिन है नहीं तुम भीग पाओ अबकी सावन में
- anupam shah
ये
मुमकिन
है
नहीं
तुम
भीग
पाओ
अबकी
सावन
में
ज़रूरी
तो
नहीं
है
यार
के
हर
बार
बारिश
हो
- anupam shah
Download Sher Image
बहुत
मुद्दत
के
बा'द
आई
है
बारिश
और
उस
ज़ालिम
के
पेपर
चल
रहे
हैं
Ahmad Farhad
Send
Download Image
42 Likes
जाने
कैसे
ख़ुश
रहने
की
आदत
डाली
जाती
है
उनके
यहाँ
तो
बारिश
में
भी
धूप
निकाली
जाती
है
Ritesh Rajwada
Send
Download Image
40 Likes
ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
Read Full
Khalil Ur Rehman Qamar
Send
Download Image
41 Likes
आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
Send
Download Image
32 Likes
धूप
तो
धूप
ही
है
इसकी
शिकायत
कैसी
अब
की
बरसात
में
कुछ
पेड़
लगाना
साहब
Nida Fazli
Send
Download Image
49 Likes
वो
ग़ुस्से
में
सीधी
बात
नहीं
करता
तूफ़ानों
में
बारिश
तिरछी
होती
है
Ankit Maurya
Send
Download Image
33 Likes
कच्चा
सा
घर
और
उस
पर
जोरों
की
बरसात
है
ये
तो
कोई
खानदानी
दुश्मनी
की
बात
है
Saahir
Send
Download Image
14 Likes
अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
Send
Download Image
47 Likes
दिन
में
मिल
लेते
कहीं
रात
ज़रूरी
थी
क्या?
बेनतीजा
ये
मुलाक़ात
ज़रूरी
थी
क्या
मुझ
सेे
कहते
तो
मैं
आँखों
में
बुला
लेता
तुम्हें
भीगने
के
लिए
बरसात
ज़रूरी
थी
क्या
Read Full
Abrar Kashif
Send
Download Image
82 Likes
तुझे
करनी
है
तो
मुसावात
कर
कि
बेहतर
हमारे
भी
हालात
कर
मिटा
दिल
में
बनते
ये
सहराओं
को
ख़ुदा
अपने
बन्दों
पे
बरसात
कर
Read Full
Siddharth Saaz
Send
Download Image
20 Likes
Read More
तन्हा
जीते
जी
मर
जाना
पड़ता
है
ऐसे
ही
क्या
प्यार
निभाना
पड़ता
है
जिसके
बिना
नहीं
ये
दिल
मेरा
लगता
उसके
घर
तो
आना
जाना
पड़ता
है
मय-ख़ाने
से
पीकर
हम
घर
को
निकले
रस्ते
में
भी
इक
मयखाना
पड़ता
है
कह
देना
कि
इश्क़
है
आसाँ
काम
नहीं
कहने
में
थोड़ा
हकलाना
पड़ता
है
जब
आँखों
से
राज
कोई
पढ़
लेता
है
अपने
ही
सच
को
झुठलाना
पड़ता
है
Read Full
anupam shah
Download Image
7 Likes
मैं
अर्से
बाद
इतनी
कश्मकश
में
फिर
से
गुज़रा
हूँ
कि
तेरी
इन्तिज़ारी
है
औ
तन्हा
भी
बहुत
ख़ुश
हूँ
anupam shah
Send
Download Image
3 Likes
हुआ
हम
को
भला
क्या
ग़म
चलो
हम
भी
नहीं
कहते
अरे
तुम
भी
तो
कोई
बात
सीधी-सी
नहीं
कहते
निगाहों
को
तिरी
पढ़ना
अजब
सी
कश्मकश
है
ये
न
चुप
रहते
हैं
दोनों
और
ये
कुछ
भी
नहीं
कहते
Read Full
anupam shah
Send
Download Image
6 Likes
तुम्हें
ही
सोचते
हैं
हर
घड़ी
हर
पल
ख़यालों
में
अरे
तुमने
कहा
था
जाओगे
तुम
छोड़कर
तन्हा
anupam shah
Send
Download Image
5 Likes
कि
ख़त
में
लिख
दिया
अहवाल
अच्छा
जो
बाक़ी
और
है
फ़िलहाल
अच्छा
तुम्हें
उजड़े
दरख़्तों
की
हैं
फ़िक्रें
जो
ऐसा
है
तो
मैं
पामाल
अच्छा
ये
मुझको
क्या
परीशाँ
कर
रहा
है
तुम्हारा
तिल
तुम्हारा
गाल
अच्छा
यही
इक
झूठ
बस
बोला
है
तुम
सेे
तुम्हारे
बिन
है
मेरा
हाल
अच्छा
अभी
तक
हूँ
चहकता
याद
करके
ये
जो
गुज़रा
है
पिछला
साल
अच्छा
Read Full
anupam shah
Download Image
0 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Taj Mahal Shayari
Fantasy Shayari
Shajar Shayari
Basant Shayari
Partition Shayari