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anupam shah
samandar yuñ nahin khaara hua tha
samandar yuñ nahin khaara hua tha | समुंदर यूँँ नहीं खारा हुआ था
- anupam shah
समुंदर
यूँँ
नहीं
खारा
हुआ
था
बिछड़
कर
आपसे
हारा
हुआ
था
कि
मुझ
में
हौसला
तो
था
बहुत
पर
मैं
बस
इस
वक़्त
का
मारा
हुआ
था
- anupam shah
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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जिसे
बस
देखने
की
आस
में
जीते
थे
कल
तक
हम
दिया
पैग़ाम
कल
उसने
कि
मैं
तो
अब
पराया
हूँ
Amaan Pathan
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सहर
की
आस
लगाए
हुए
हैं
वो
कि
जिन्हें
कमान-ए-शब
से
चले
तीर
की
ख़बर
भी
नहीं
Abhishek shukla
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बिखर
के
फूल
फ़ज़ाओं
में
बास
छोड़
गया
तमाम
रंग
यहीं
आस-पास
छोड़
गया
Aanis Moin
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न
जाने
क्यूँँ
गले
से
लगने
की
हिम्मत
नहीं
होती
न
जाने
क्यूँँ
पिता
के
सामने
बेटे
नहीं
खुलते
Kushal Dauneria
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दु'आ
करो
कि
सलामत
रहे
मिरी
हिम्मत
ये
इक
चराग़
कई
आँधियों
पे
भारी
है
Waseem Barelvi
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बिछड़ने
का
इरादा
है
तो
मुझ
से
मशवरा
कर
लो
मोहब्बत
में
कोई
भी
फ़ैसला
ज़ाती
नहीं
होता
Afzal Khan
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जीने
का
इरादा
है
मगर
फिर
भी
कहीं
से
कोई
तो
इशारा
हो
मिरा
अज़्म
जवाँ
हो
Sohit Singla
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मुझको
जीने
का
हौसला
दीजे
वरना
रिश्तों
का
फ़ाएदा
क्या
है
Praveen Sharma SHAJAR
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उसी
की
आस
ने
सँभाल
रक्खा
हिज्र
में
मुझे
वही
जो
अपनी
ज़ुल्फ़ें
तक
नहीं
सँवार
पाती
है
Harsh saxena
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ज़िन्दगी
इस
तरह
ही
लुटाता
रहा
प्यार
खोता
रहा
प्यार
पाता
रहा
एक
मंज़र
ने
यूँँ
रोक
दी
ज़िंदगी
बारहा
सामने
मेरे
आता
रहा
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anupam shah
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दीवारों
पे
सर
धुनता
हूँ
बिन
तेरे
कितना
तन्हा
हूँ
ऐसे
तो
पागल
हूँ
फिर
भी
पागल
होने
से
डरता
हूँ
ज़ख़्म
नया
ले
लेता
हूँ
मैं
पिछला
कुछ
ऐसे
भरता
हूँ
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anupam shah
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शराबों
से
ख़ुमारी
आ
रही
है
नशा
तेरा
उतरता
जा
रहा
है
anupam shah
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लो
जी
रहे
हो
तुम
भी
देखो
बिना
मोहब्बत
तुम
भी
कहा
किए
थे
मर
जाएँगे
यूँँ
हम
तो
anupam shah
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शोर
की
जब
ये
आदत
हमें
हो
गई
बज़्म
तन्हा
हमें
कर
के
ख़ुद
सो
गई
सब
सेे
मिलता
रहा
नाम
लेकर
तेरा
ये
ख़ता
मुझ
सेे
सौ
मर्तबा
हो
गई
टूटकर
के
मैं
सच
को
दिखाता
रहा
आइनो
सी
मेरी
ज़िन्दगी
हो
गई
उसकी
इक
मुस्कुराहट
को
तड़पे
बहुत
वो
ख़फ़ा
जब
हुई
आप
ही
रो
गई
एक
तितली
जो
थी
फूल
पर
बस
फ़िदा
उड़
गईं
खुशबुएँ
बे-वफ़ा
हो
गई
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anupam shah
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