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anupam shah
lo jee rahe ho tum bhi dekho bina mohabbat
lo jee rahe ho tum bhi dekho bina mohabbat | लो जी रहे हो तुम भी देखो बिना मोहब्बत
- anupam shah
लो
जी
रहे
हो
तुम
भी
देखो
बिना
मोहब्बत
तुम
भी
कहा
किए
थे
मर
जाएँगे
यूँँ
हम
तो
- anupam shah
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कहीं
पड़े
न
मोहब्बत
की
मार
होली
में
अदास
प्रेम
करो
दिल
से
प्यार
होली
में
Nazeer Banarasi
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इक
शहंशाह
ने
दौलत
का
सहारा
ले
कर
हम
ग़रीबों
की
मोहब्बत
का
उड़ाया
है
मज़ाक़
Sahir Ludhianvi
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जता
दिया
कि
मोहब्बत
में
ग़म
भी
होते
हैं
दिया
गुलाब
तो
काँटे
भी
थे
गुलाब
के
साथ
Rehman Faris
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तुम
मेरी
पहली
मोहब्बत
तो
नहीं
हो
लेकिन
मैंने
चाहा
है
तुम्हें
पहली
मोहब्बत
की
तरह
Wasi Shah
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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मुहब्बत
के
समुंदर
की
कलाकारी
ग़ज़ब
की
है
कि
सब
कुछ
डूब
जाता
है
मगर
तर
कुछ
नहीं
होता
Muntazir Firozabadi
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वो
लोग
हम
ही
थे
मुहब्बत
में
जो
फिर
आगे
हुए
वो
लोग
हम
ही
थे
मियाँ
जो
दूर
भागे
जिस्म
से
Kartik tripathi
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वो
नहीं
मेरा
मगर
उस
से
मोहब्बत
है
तो
है
ये
अगर
रस्मों
रिवाजों
से
बग़ावत
है
तो
है
Deepti Mishra
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ये
कहना
था
उन
से
मोहब्बत
है
मुझ
को
ये
कहने
में
मुझ
को
ज़माने
लगे
हैं
Khumar Barabankvi
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ऐ
मौज-ए-हवादिस
तुझे
मालूम
नहीं
क्या
हम
अहल-ए-मोहब्बत
हैं
फ़ना
हो
नहीं
सकते
Asad Bhopali
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ख़्वाब
इतना
भी
हसीं
मत
देखो
नींद
टूटे
तो
न
ये
शब
गुज़रे
anupam shah
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तुम्हें
सोचकर
के
मैं
यूँँ
खिल
रहा
हूँ
कि
करवट
बदल
कर
तुम्हें
मिल
रहा
हूँ
वो
जिस
पर
से
लौटे
हैं
सारे
मुसाफ़िर
मैं
ऐसे
ही
दरिया
का
साहिल
रहा
हूँ
बहुत
वक़्त
बीता
समझने
में
ये
भी
मैं
आसाँ
रहा
हूँ
या
मुश्किल
रहा
हूँ
मुझे
छोड़ने
का
गुमाँ
यूँँ
न
करना
न
जाने
मैं
कितनों
की
मंज़िल
रहा
हूँ
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anupam shah
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हैं
जो
बातें
ये
बस
ख़याली
हैं
और
फिर
हाथ
भी
तो
ख़ाली
हैं
anupam shah
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दिल
ही
दिल
में
न
बातें
बनाया
करो
सामने
जब
हो
तो
कुछ
बताया
करो
अपनी
मस्ती
में
बस्ती
बसाया
करो
जो
जले
दिल
किसी
का
जलाया
करो
ख़ल्वतों
में
है
जीने
की
बस
ये
अदा
आइना
देखकर
मुस्कुराया
करो
बात
करने
का
है
बस
सलीक़ा
यही
एक
सुन
कर
के
दूजी
सुनाया
करो
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anupam shah
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सुलझाऊँ
तेरी
ज़ुल्फ़
से
हाथों
की
लकीरें
ये
काम
मगर
मुझ
सेे
अकेले
नहीं
होगा
anupam shah
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