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anupam shah
jahaan tak na nazar jaa.e ye main tu ye na rah jaa.e
jahaan tak na nazar jaa.e ye main tu ye na rah jaa.e | जहाँ तक न नज़र जाए, ये मैं तू ये न रह जाए
- anupam shah
जहाँ
तक
न
नज़र
जाए,
ये
मैं
तू
ये
न
रह
जाए
मुकम्मल
इश्क़
करना
तुम,
जहाँ
ये
दिल
न
घबराए
- anupam shah
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मानी
हैं
मैं
ने
सैकड़ों
बातें
तमाम
उम्र
आज
आप
एक
बात
मेरी
मान
जाइए
Ameer Minai
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नहीं
है
लब
पे
दिखावे
का
भी
तबस्सुम
अब
हमें
किसी
ने
मुक़म्मल
उदास
कर
दिया
है
Amaan Haider
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चलो
माना
कि
रोना
मसअले
का
हल
नहीं
लेकिन
करे
भी
क्या
कोई
जब
ख़त्म
हर
उम्मीद
हो
जाए
Bhaskar Shukla
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अंजाम
उसके
हाथ
है
आग़ाज़
करके
देख
भीगे
हुए
परों
से
ही
परवाज़
करके
देख
Nawaz Deobandi
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सूरज
लिहाफ़
ओढ़
के
सोया
तमाम
रात
सर्दी
से
इक
परिंदा
दरीचे
में
मर
गया
Athar nasik
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अब
मिरा
ध्यान
कहीं
और
चला
जाता
है
अब
कोई
फ़िल्म
मुकम्मल
नहीं
देखी
जाती
Jawwad Sheikh
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किसी
बहाने
से
उसकी
नाराज़गी
ख़त्म
तो
करनी
थी
उसके
पसंदीदा
शाइर
के
शे'र
उसे
भिजवाए
हैं
Ali Zaryoun
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मसअला
ख़त्म
हुआ
चाहता
है
दिल
बस
अब
ज़ख़्म
नया
चाहता
है
Shakeel Jamali
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तमाम
जिस्म
को
आँखें
बना
के
राह
तको
तमाम
खेल
मुहब्बत
में
इंतिज़ार
का
है
Munawwar Rana
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भरे
हुए
जाम
पर
सुराही
का
सर
झुका
तो
बुरा
लगेगा
जिसे
तेरी
आरज़ू
नहीं
तू
उसे
मिला
तो
बुरा
लगेगा
ये
आख़िरी
कंपकंपाता
जुमला
कि
इस
तअ'ल्लुक़
को
ख़त्म
कर
दो
बड़े
जतन
से
कहा
है
उस
ने
नहीं
किया
तो
बुरा
लगेगा
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Zubair Ali Tabish
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बहुत
कुछ
खो
दिया
है
तब
कहीं
अब
ख़ुद
को
पाया
है
मिरी
जाँ
इश्क़
हो
या
दुश्मनी
अब
मैं
न
बदलूँगा
anupam shah
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शराबों
से
ख़ुमारी
आ
रही
है
नशा
तेरा
उतरता
जा
रहा
है
anupam shah
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ख़ुदा
तुमको
अगर
कोई
तुम्हीं
जैसा
अता
करता
सनम
तुमको
भी
रहता
याद
कैसा
इश्क़
होता
है
anupam shah
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मौसम
प'
मिरा
कोई
इख़्तियार
नहीं
है
अब
की
ख़िज़ाँ
के
बाद
में
बहार
नहीं
है
वा'दा
लबों
पे
है
जो
निगाहों
में
नहीं
है
बोसा
तो
दे
दिया
यूँँ
मगर
प्यार
नहीं
है
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anupam shah
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वही
है
आदमी
तक़दीर
वाला
जिसे
दो
वक़्त
का
हासिल
निवाला
तेरी
क़ुरबत
में
खाए
हैं
यूँँ
धोखे
कि
जैसे
आसतीं
में
साँप
पाला
हमारी
राह
में
ही
आ
गिरा
फिर
वही
पत्थर
जो
तबियत
से
उछाला
मुहब्बत
बाद
मेरे
तुमने
जो
की
मेरा
ग़ुस्सा
रक़ीबों
पर
निकाला
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anupam shah
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