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Nawaz Deobandi
anjaam uske haath hai aaghaaz karke dekh
anjaam uske haath hai aaghaaz karke dekh | अंजाम उसके हाथ है आग़ाज़ करके देख
- Nawaz Deobandi
अंजाम
उसके
हाथ
है
आग़ाज़
करके
देख
भीगे
हुए
परों
से
ही
परवाज़
करके
देख
- Nawaz Deobandi
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मैं
तमाम
दिन
का
थका
हुआ
तू
तमाम
शब
का
जगा
हुआ
ज़रा
ठहर
जा
इसी
मोड़
पर
तेरे
साथ
शाम
गुज़ार
लूँ
Bashir Badr
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घर
की
इस
बार
मुकम्मल
मैं
तलाशी
लूँगा
ग़म
छुपा
कर
मिरे
माँ
बाप
कहाँ
रखते
थे
Unknown
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मिरे
सलीक़े
से
मेरी
निभी
मोहब्बत
में
तमाम
उम्र
मैं
नाकामियों
से
काम
लिया
Meer Taqi Meer
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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उस
के
होंटों
पे
रख
के
होंट
अपने
बात
ही
हम
तमाम
कर
रहे
हैं
Jaun Elia
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फ़र्क़
इतना
है
कि
तू
पर्दे
में
और
मैं
बे-हिजाब
वर्ना
मैं
अक्स-ए-मुकम्मल
हूँ
तिरी
तस्वीर
का
Asad Bhopali
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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किसी
बहाने
से
उसकी
नाराज़गी
ख़त्म
तो
करनी
थी
उसके
पसंदीदा
शाइर
के
शे'र
उसे
भिजवाए
हैं
Ali Zaryoun
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चलो
माना
कि
रोना
मसअले
का
हल
नहीं
लेकिन
करे
भी
क्या
कोई
जब
ख़त्म
हर
उम्मीद
हो
जाए
Bhaskar Shukla
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यूँँ
दिल
को
तड़पने
का
कुछ
तो
है
सबब
आख़िर
या
दर्द
ने
करवट
ली
या
तुम
ने
इधर
देखा
Jigar Moradabadi
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देखा
है
बिछड़
कर
के
बिछड़ने
का
असर
भी
मुझ
पर
तो
बहुत
होता
है
उस
पर
नहीं
होता
Nawaz Deobandi
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बदनज़र
उठने
ही
वाली
थी
किसी
की
जानिब
अपने
बेटी
का
ख़याल
आया
तो
दिल
काँप
गया
Nawaz Deobandi
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सच्चाई
को
अपनाना
आसान
नहीं
दुनिया
भर
से
झगड़ा
करना
पड़ता
है
Nawaz Deobandi
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धूप
को
साया
ज़मीं
को
आसमाँ
करती
है
माँ
हाथ
रखकर
मेरे
सर
पर
सायबाँ
करती
है
माँ
मेरी
ख़्वाहिश
और
मेरी
ज़िद
उसके
क़दमों
पर
निसार
हाँ
की
गुंज़ाइश
न
हो
तो
फिर
भी
हाँ
करती
है
माँ
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Nawaz Deobandi
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लेके
माज़ी
को
जो
हाल
आया
तो
दिल
काँप
गया
जब
कभी
उनका
ख़याल
आया
तो
दिल
काँप
गया
ऐसा
तोड़ा
था
मुहब्बत
में
किसी
ने
दिल
को
जब
किसी
शीशे
में
बाल
आया
तो
दिल
काँप
गया
सर
बलंदी
पे
तो
मग़रूर
थे
हम
भी
लेकिन
चढ़ते
सूरज
पे
ज़वाल
आया
तो
दिल
काँप
गया
बदनज़र
उठने
ही
वाली
थी
किसी
की
जानिब
अपने
बेटी
का
ख़याल
आया
तो
दिल
काँप
गया
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Nawaz Deobandi
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