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Shakeel Jamali
mas'ala khatm hua chahta hai
mas'ala khatm hua chahta hai | मसअला ख़त्म हुआ चाहता है
- Shakeel Jamali
मसअला
ख़त्म
हुआ
चाहता
है
दिल
बस
अब
ज़ख़्म
नया
चाहता
है
- Shakeel Jamali
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तो
क्या
ये
हो
नहीं
सकता
कि
तुझ
से
दूर
हो
जाऊँँ
मैं
तुझ
को
भूलने
के
वासते
मजबूर
हो
जाऊँ
सुना
है
टूटने
पर
दिल
सभी
कुछ
कर
गुजरते
हैं
मुझे
भी
तोड़
दो
इतना
कि
मैं
मशहूर
हो
जाऊँ
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SHIV SAFAR
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दिल
हारने
के
बाद
ही
आता
है
ये
सुख़न
अब
तक
किसी
ने
कोख
से
शायर
नहीं
जना
Anas Khan
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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आज
है
उनको
आना,
मज़ा
आएगा
फिर
जलेगा
ज़माना,
मज़ा
आएगा
तीर
उनकी
नज़र
के
चलेंगे
कई
दिल
बनेगा
निशाना
मज़ा
आएगा
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Bhaskar Shukla
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शक
है
तुझे
अगर
ये
अब
भी
गुदाज़
है
दिल
तो
सीने
से
कभी
ये
पत्थर
निकाल
मेरा
Abhay Aadiv
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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मसअला
फिर
वही
बे-घर
हुए
लोगों
का
है
हम
सभी
दिल
से
निकाले
कहाँ
तक
जाएँगे
Neeraj Neer
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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इतनी
सारी
यादों
के
होते
भी
जब
दिल
में
वीरानी
होती
है
तो
हैरानी
होती
है
Afzal Khan
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सफ़र
से
लौट
जाना
चाहता
है
परिंदा
आशियाना
चाहता
है
कोई
स्कूल
की
घंटी
बजा
दे
ये
बच्चा
मुस्कुराना
चाहता
है
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Shakeel Jamali
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मौत
को
हम
ने
कभी
कुछ
नहीं
समझा
मगर
आज
अपने
बच्चों
की
तरफ़
देख
के
डर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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सब
से
पहले
दिल
के
ख़ाली-पन
को
भरना
पैसा
सारी
उम्र
कमाया
जा
सकता
है
Shakeel Jamali
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कहानी
में
छोटा
सा
किरदार
है
हमारा
मगर
एक
मेआ'र
है
ख़ुदा
तुझ
को
सुनने
की
तौफ़ीक़
दे
मिरी
ख़ामुशी
मेरा
इज़हार
है
ये
कैसे
इलाक़े
में
हम
आ
बसे
घरों
से
निकलते
ही
बाज़ार
है
सियासत
के
चेहरे
पे
रौनक़
नहीं
ये
औरत
हमेशा
की
बीमार
है
हक़ीक़त
का
इक
शाइबा
तक
नहीं
तुम्हारी
कहानी
मज़ेदार
है
तअ'ल्लुक़
की
तजहीज़-ओ-तकफ़ीन
कर
वो
दामन
छुड़ाने
को
तय्यार
है
पड़ोसी
पड़ोसी
से
है
बे-ख़बर
मगर
सब
के
हाथों
में
अख़बार
है
ये
छुट्टी
का
दिन
हम
से
मत
छीनना
यही
हम
ग़रीबों
का
त्यौहार
है
उसे
मश्वरों
की
ज़रूरत
नहीं
वो
तुम
से
ज़ियादा
समझदार
है
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Shakeel Jamali
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दिल
उसकी
मोहब्बत
में
परेशान
तो
होगा
अब
आग
से
खेलोगे
तो
नुक़सान
तो
होगा
वादे
पे
न
आओगे
तो
तफ़्तीश
तो
होगी
कानून
को
तोड़ोगे
तो
चालान
तो
होगा
हमने
तो
उसे
एक
अँगूठी
भी
नहीं
दी
वो
ताज-महल
देख
के
हैरान
तो
होगा
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Shakeel Jamali
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