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Shakeel Jamali
dil uski mohabbat men pareshaan to hogaa
dil uski mohabbat men pareshaan to hogaa | दिल उसकी मोहब्बत में परेशान तो होगा
- Shakeel Jamali
दिल
उसकी
मोहब्बत
में
परेशान
तो
होगा
अब
आग
से
खेलोगे
तो
नुक़सान
तो
होगा
वादे
पे
न
आओगे
तो
तफ़्तीश
तो
होगी
कानून
को
तोड़ोगे
तो
चालान
तो
होगा
हमने
तो
उसे
एक
अँगूठी
भी
नहीं
दी
वो
ताज-महल
देख
के
हैरान
तो
होगा
- Shakeel Jamali
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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गले
मिलना
न
मिलना
तो
तेरी
मर्ज़ी
है
लेकिन
तेरे
चेहरे
से
लगता
है
तेरा
दिल
कर
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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इतनी
सारी
यादों
के
होते
भी
जब
दिल
में
वीरानी
होती
है
तो
हैरानी
होती
है
Afzal Khan
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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किसी
से
छोटी
सी
एक
उम्मीद
बाँध
लीजिए
मोहब्बतों
का
अगर
जनाज़ा
निकालना
है
Shakeel Jamali
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वफ़ादारों
पे
आफ़त
आ
रही
है
मियाँ
ले
लो
जो
क़ीमत
आ
रही
है
मैं
उस
से
इतने
वा'दे
कर
चुका
हूँ
मुझे
इस
बार
ग़ैरत
आ
रही
है
न
जाने
मुझ
में
क्या
देखा
है
उस
ने
मुझे
उस
पर
मोहब्बत
आ
रही
है
बदलता
जा
रहा
है
झूट
सच
में
कहानी
में
सदाक़त
आ
रही
है
मिरा
झगड़ा
ज़माने
से
नहीं
है
मिरे
आड़े
मोहब्बत
आ
रही
है
अभी
रौशन
हुआ
जाता
है
रस्ता
वो
देखो
एक
औरत
आ
रही
है
मुझे
उस
की
उदासी
ने
बताया
बिछड़
जाने
की
साअ'त
आ
रही
है
बड़ों
के
दरमियाँ
बैठा
हुआ
हूँ
नसीहत
पर
नसीहत
आ
रही
है
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Shakeel Jamali
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कुछ
लोग
हैं
जो
झेल
रहे
हैं
मुसीबतें
कुछ
लोग
हैं
जो
वक़्त
से
पहले
बदल
गए
Shakeel Jamali
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मौत
को
हम
ने
कभी
कुछ
नहीं
समझा
मगर
आज
अपने
बच्चों
की
तरफ़
देख
के
डर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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रिश्तों
की
दलदल
से
कैसे
निकलेंगे
हर
साज़िश
के
पीछे
अपने
निकलेंगे
Shakeel Jamali
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