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anupam shah
gair ki mehfil men itni bekhu
gair ki mehfil men itni bekhu | गैर की महफ़िल में इतनी बेख़ुदी अच्छी नहीं
- anupam shah
गैर
की
महफ़िल
में
इतनी
बेख़ुदी
अच्छी
नहीं
लौटना
हो
घर
को
वापस
तो
मुसीबत
मयकशी
- anupam shah
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देखो
तो
चश्म-ए-यार
की
जादू-निगाहियाँ
बेहोश
इक
नज़र
में
हुई
अंजुमन
तमाम
Hasrat Mohani
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दूर
हूँ
लेकिन
बता
सकता
हूँ
उन
की
बज़्म
में
क्या
हुआ
क्या
हो
रहा
है
और
क्या
होने
को
है
Shakeel Badayuni
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बात
करनी
मुझे
मुश्किल
कभी
ऐसी
तो
न
थी
जैसी
अब
है
तेरी
महफ़िल
कभी
ऐसी
तो
न
थी
Bahadur Shah Zafar
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मैं
तुझे
बज़्म
में
लाऊँगा
मेरी
जान
मगर
लोग
जब
दूसरे
चेहरों
पे
फ़िदा
हो
जाएँ
Ashu Mishra
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न
जाने
कब
से
इक
मतला
लिए
बैठा
हूँ
महफ़िल
में
तुम्हारा
ज़िक्र
कर
दे
कोई
तो
पूरी
ग़ज़ल
कर
लूँ
Harsh saxena
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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ख़ुशबू
से
किस
ज़बान
में
बातें
करेंगे
लोग
महफ़िल
में
ये
सवाल
तुझे
देख
कर
हुआ
Mansoor Usmani
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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मुझ
सेे
होकर
के
ही
बे-ज़ार
चले
जाते
हैं
मेरी
महफ़िल
से
मेरे
यार
चले
जाते
हैं
मुझको
मालूम
है
रहता
नहीं
है
अब
वो
वहाँँ
साल
में
फिर
भी
हम
इक
बार
चले
जाते
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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ज़ेहन
से
यादों
के
लश्कर
जा
चुके
वो
मेरी
महफ़िल
से
उठ
कर
जा
चुके
मेरा
दिल
भी
जैसे
पाकिस्तान
है
सब
हुकूमत
करके
बाहर
जा
चुके
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Tehzeeb Hafi
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कुछ
तो
थी
बात
मुहब्बत
में
तेरी
शाहजहाँ
ताज
अब
कौन
बनाता
है
बिछड़ने
पे
यहॉं
anupam shah
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क्या
हुआ
क्यूँ
ख़फ़ा
हो
गई
ज़िन्दगी
क्या
बना
क्या
मिटा
क्या
हुई
ज़िन्दगी
आपको
गर
मिले
तो
बताना
हमें
ढूंढता
हूँ
जो
है
खो
गई
ज़िन्दगी
लिख
के
फेंकू
इसे
फिर
नई
सी
लिखूं
ज़िन्दगी
का
मसौदा
हुई
ज़िन्दगी
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anupam shah
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है
मुझको
रश्क़
तेरी
पाँव
की
पायल
से
इतना
यूँँ
लिपट
कर
पाँव
से
तेरे
ये
इतना
नाचती
क्यूँँ
है
anupam shah
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इश्क़
का
ज़ख़्म
ताज़ा
हरा
कर
लिया
एक
इल्ज़ाम
था
हमने
जो
सर
लिया
हमने
सोचा
नहीं
इश्क़
में
फिर
नफ़ा
राह
में
जो
मिला
बाँह
में
भर
लिया
आप
पिघले
नहीं
देखकर
अश्क़
ये
एक
पत्थर
को
हमने
सनम
कर
लिया
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anupam shah
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पुरानी
बात
पर
कब
तक
नए
क़िस्से
बिगाड़ोगे
समर
न
दे
सका
तो
क्या
दरख़्तों
को
जला
दोगे
anupam shah
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