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anupam shah
ab main kehne ko to kah doon ki nahin ho tum par
ab main kehne ko to kah doon ki nahin ho tum par | अब मैं कहने को तो कह दूँ कि नहीं हो तुम पर,
- anupam shah
अब
मैं
कहने
को
तो
कह
दूँ
कि
नहीं
हो
तुम
पर,
एक
ये
झूठ
सहारा
है
इसे
रहने
दो
- anupam shah
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खुला
फ़रेब-ए-मोहब्बत
दिखाई
देता
है
अजब
कमाल
है
उस
बे-वफ़ा
के
लहजे
में
Iftikhar Arif
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किसी
के
झूठ
से
पर्दा
हटाकर
हमारा
सच
बहुत
रोया
था
उस
दिन
Shadab Asghar
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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खुला
है
झूठ
का
बाज़ार
आओ
सच
बोलें
न
हो
बला
से
ख़रीदार
आओ
सच
बोलें
Qateel Shifai
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बस
एक
लम्हे
के
सच
झूट
के
एवज़
'फ़रहत'
तमाम
उम्र
का
इल्ज़ाम
ले
गया
मुझ
से
Farhat Abbas Shah
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दिल-ओ-नज़र
को
अभी
तक
वो
दे
रहे
हैं
फ़रेब
तसव्वुरात-ए-कुहन
के
क़दीम
बुत-ख़ाने
Ali Sardar Jafri
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ख़्वाबों
को
आँखों
से
मिन्हा
करती
है
नींद
हमेशा
मुझ
सेे
धोखा
करती
है
उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वग़ैरा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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तुमको
हम
ही
झूठ
लगेंगे
लेकिन
दरिया
झूठा
है
पहले
हमको
चाँद
मिला
था
फिर
दरिया
को
चाँद
मिला
Abhishar Geeta Shukla
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मैं
सच
कहूँगी
मगर
फिर
भी
हार
जाऊँगी
वो
झूट
बोलेगा
और
ला-जवाब
कर
देगा
Parveen Shakir
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वो
आफ़ताब
लाने
का
देकर
हमें
फ़रेब
हम
सेे
हमारी
रात
के
जुगनू
भी
ले
गया
Rajesh Reddy
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शराबों
से
ख़ुमारी
आ
रही
है
नशा
तेरा
उतरता
जा
रहा
है
anupam shah
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संग-ए-मरमर
की
मूरत
नहीं
आदमी
इस
क़दर
ख़ूब-सूरत
नहीं
आदमी
चंद
क़िस्सों
की
दरकार
है
बस
इसे
आदमी
की
ज़रूरत
नहीं
आदमी
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anupam shah
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इस
तरह
से
तुम्हें
मैं
ज़िंदगी
में
लाऊँगा
गीत
पर
गीत
लिख
के
रोज़
तुझको
गाऊँगा
एक
शायर
ने
तेरा
नाम
लिख
लिया
दिल
पे
और
फिर
क्या
हसीं
ग़ज़ल
तुझे
सुनाऊँगा
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anupam shah
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मोहब्बत
में
इज़ाफ़ा
हो
रहा
है
मगर
ख़र्चा
ज़ियादा
हो
रहा
है
anupam shah
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जहाँ
तक
न
नज़र
जाए,
ये
मैं
तू
ये
न
रह
जाए
मुकम्मल
इश्क़
करना
तुम,
जहाँ
ये
दिल
न
घबराए
anupam shah
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