जलतीहैरूहआजभीबाद-ए-बहारसे
निकलेनहींअभीभीतेरेहीख़ुमारसे
क़श्तीनपाईहमनेकिएसैकड़ोंजतन
तुमकोपुकारतेरहेदरियाकेपारसे
माराहमेंकिसीकीज़ुबाँऔरनज़रनेही
हमकोअसरहुआनहींख़ंजरकेवारसे
अबख़ुदकेदिलपेकोईभरोसानहींरहा
अपनातोए'तिबारउठाए'तिबारसे
जोटूटजाएदेखकेबसचंदमुश्किलें
ख़ुदकोबचाईयेगासनमइसकरारसे