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Anant Gupta
bataana gar dikhe tum ko bhatkte paanv ke chaale
bataana gar dikhe tum ko bhatkte paanv ke chaale | बताना गर दिखें तुम को भटकते पाँव के छाले
- Anant Gupta
बताना
गर
दिखें
तुम
को
भटकते
पाँव
के
छाले
कई
बरसों
से
ग़ाएब
हैं
हमारे
पाँव
के
छाले
किसी
के
पाँव
में
सूखे
किसी
की
आँख
के
आँसू
किसी
की
आँख
में
फूटे
किसी
के
पाँव
के
छाले
फ़लक
के
पार
दर्शी
फ़र्श
पर
कब
से
खड़ा
कोई
सितारे
लग
रहे
हैं
जो
हैं
उस
के
पाँव
के
छाले
- Anant Gupta
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वक़्त
आने
दे
दिखा
देंगे
तुझे
ऐ
आसमाँ
हम
अभी
से
क्यूँँ
बताएँ
क्या
हमारे
दिल
में
है
Bismil Azimabadi
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बाज़
बनना
है
तो
फिर
कद
भूल
जा
आँख
में
रख
लक्ष्य
और
हद
भूल
जा
किसलिए
डरता
है
दीवारों
से
तू
आ
समाँँ
को
देख
सरहद
भूल
जा
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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आसमाँ
ने
बंद
कर
लीं
खिड़कियाँ
अब
ज़मीं
में
उसकी
दिलचस्पी
नहीं
Rajesh Reddy
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ऐ
आसमान
तेरी
इनायत
बजा
मगर
फ़स्लें
पकी
हुई
हों
तो
बारिश
फ़ुज़ूल
है
Shahid Zaki
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मेरे
हुजरे
में
नहीं
और
कहीं
पर
रख
दो
आसमाँ
लाए
हो
ले
आओ
ज़मीं
पर
रख
दो
Rahat Indori
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मैं
घंटों
आसमाँ
में
देखता
था
ज़मीं
को
पीठ
के
नीचे
लगा
के
Siddharth Saaz
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आज
बादल
के
सहारे
उसने
ख़त
भेजा
हमें
आसमाँ
क़ासिद
है
कैसा
लफ़्ज़
बरसाता
नहीं
Shan Sharma
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आसमाँ
में
है
ख़ुदा,
क्या
सब
दुआएंँ
आसमाँ
तक
जा
रही
हैं
मेरी
इक
फ़रयाद
पूरी
हो
तो
मैं
मानूँ
वहाँ
तक
जा
रही
हैं
Saahir
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तेरे
दामन
में
सितारे
हैं
तो
होंगे
ऐ
फ़लक
मुझ
को
अपनी
माँ
की
मैली
ओढ़नी
अच्छी
लगी
Munawwar Rana
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राहों
में
जान
घर
में
चराग़ों
से
शान
है
दीपावली
से
आज
ज़मीन
आसमान
है
Obaid Azam Azmi
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दिखावा
ही
करना
है
तो
फिर
बड़ा
कर
तू
शायर
नहीं
ख़ुद
को
'आशिक़
कहा
कर
बदन
से
उछल
कर
निकल
आएगी
रूह
मेरे
ख़्वाब
में
ग़ैर
को
मत
छुआ
कर
बहुत
देर
कर
दी
ये
कहने
में
मैंने
ज़रा
तो
सुनो
मुझको
इतना
सुनाकर
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Anant Gupta
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इक
जिस्म
से
जवानी
ऐसे
बिछड़
रही
है
जैसे
दुल्हन
की
मेहँदी
बिस्तर
पे
झड़
रही
है
हथियार
डाले
बैठा
हारा
हुआ
ये
लड़का
और
वो
हसीन
लड़की
दुनिया
से
लड़
रही
है
तंग
आ
चुके
"अनंत''
अब
ले
ले
पतंग
अना
की
मैं
ढील
दे
रहा
हूँ
ये
और
अकड़
रही
है
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Anant Gupta
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साथ
नाकामी
लिए
फिरते
हैं
हम
आप
को
या'नी
लिए
फिरते
हैं
हम
तू
कभी
हम
को
कहीं
मिल
तो
सही
तिश्नगी
पानी
लिए
फिरते
हैं
हम
मौत
आने
तक
तलाशेंगे
उसे
ज़िंदगी
जिस
की
लिए
फिरते
हैं
हम
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Anant Gupta
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बदन
की
क्या
ज़रूरत
हिज्र
में
तो
याद
ज़िन्दाबाद
तबाही
इश्क़
में
'आशिक़
की
ज़िन्दाबाद
ज़िन्दाबाद
नया
जंगल
उगाने
में
कई
नस्लें
उजड़ती
हैं
ओ
जंगल
लूटने
वाले
तेरी
औलाद
ज़िन्दाबाद
ये
मुट्ठी
भर
सफल
लोगों
पे
लानत
फेंकते
हैं
और
'अनंत'
ऐलान
करते
हैं
कि
हैं
बर्बाद
ज़िन्दाबाद
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Anant Gupta
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मनाए
जश्न
वो
आते
हुओं
का
जिन्हें
सदमा
नहीं
बिछड़े
हुओं
का
चला
जाएगा
फ़न
सीखे
हुओं
का
मैं
शायर
हूँ
मगर
भूले
हुओं
का
किसी
की
जीत
का
रोना
नहीं
है
हमें
हासिल
है
दिल
हारे
हुओं
का
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Anant Gupta
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