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Anant Gupta
saath naakaami li.e firte hain ham
saath naakaami li.e firte hain ham | साथ नाकामी लिए फिरते हैं हम
- Anant Gupta
साथ
नाकामी
लिए
फिरते
हैं
हम
आप
को
या'नी
लिए
फिरते
हैं
हम
तू
कभी
हम
को
कहीं
मिल
तो
सही
तिश्नगी
पानी
लिए
फिरते
हैं
हम
मौत
आने
तक
तलाशेंगे
उसे
ज़िंदगी
जिस
की
लिए
फिरते
हैं
हम
- Anant Gupta
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दुनिया
मेरी
बला
जाने
महँगी
है
या
सस्ती
है
मौत
मिले
तो
मुफ़्त
न
लूँ
हस्ती
की
क्या
हस्ती
है
Fani Badayuni
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ज़िन्दगी
इक
हादसा
है
और
कैसा
हादसा
मौत
से
भी
ख़त्म
जिसका
सिलसिला
होता
नहीं
Jigar Moradabadi
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यहाँ
मौत
का
ख़ौफ़
कुछ
यूँँ
है
सबको
कि
जीने
की
ख़ातिर
मरे
जा
रहे
हैं
Sapna Moolchandani
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दफ़्न
का
एक
दिन
मुअय्यन
है
मौत
तो
रोज़
का
मुआमिला
है
Rajesh Reddy
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बद-हवा
सेी
है
बे-ख़याली
है
क्या
ये
हालत
भी
कोई
हालत
है
ज़िंदगी
से
है
जंग
शाम-ओ-सहर
मौत
से
शिकवा
है
शिकायत
है
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Chandan Sharma
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मरने
वालों
को
भी
मिलते
नहीं
मरने
वाले
मौत
ले
जा
के
ख़ुदा
जाने
कहाँ
छोड़ती
है
Krishna Bihari Noor
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मैं
आप
अपनी
मौत
की
तय्यारियों
में
हूँ
मेरे
ख़िलाफ़
आप
की
साज़िश
फ़ुज़ूल
है
Shahid Zaki
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तुम्हारी
मौत
मेरी
ज़िंदगी
से
बेहतर
है
तुम
एक
बार
मरे
मैं
तो
बार
बार
मरा
Zubair Ali Tabish
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आख़री
हिचकी
तेरे
ज़ानूँ
पे
आए
मौत
भी
मैं
शाइराना
चाहता
हूँ
Qateel Shifai
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हम
चाहते
थे
मौत
ही
हम
को
जुदा
करे
अफ़्सोस
अपना
साथ
वहाँ
तक
नहीं
हुआ
Waseem Nadir
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दिखावा
ही
करना
है
तो
फिर
बड़ा
कर
तू
शायर
नहीं
ख़ुद
को
'आशिक़
कहा
कर
बदन
से
उछल
कर
निकल
आएगी
रूह
मेरे
ख़्वाब
में
ग़ैर
को
मत
छुआ
कर
बहुत
देर
कर
दी
ये
कहने
में
मैंने
ज़रा
तो
सुनो
मुझको
इतना
सुनाकर
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Anant Gupta
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इक
जिस्म
से
जवानी
ऐसे
बिछड़
रही
है
जैसे
दुल्हन
की
मेहँदी
बिस्तर
पे
झड़
रही
है
हथियार
डाले
बैठा
हारा
हुआ
ये
लड़का
और
वो
हसीन
लड़की
दुनिया
से
लड़
रही
है
तंग
आ
चुके
"अनंत''
अब
ले
ले
पतंग
अना
की
मैं
ढील
दे
रहा
हूँ
ये
और
अकड़
रही
है
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Anant Gupta
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बताना
गर
दिखें
तुम
को
भटकते
पाँव
के
छाले
कई
बरसों
से
ग़ाएब
हैं
हमारे
पाँव
के
छाले
किसी
के
पाँव
में
सूखे
किसी
की
आँख
के
आँसू
किसी
की
आँख
में
फूटे
किसी
के
पाँव
के
छाले
फ़लक
के
पार
दर्शी
फ़र्श
पर
कब
से
खड़ा
कोई
सितारे
लग
रहे
हैं
जो
हैं
उस
के
पाँव
के
छाले
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Anant Gupta
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बदन
की
क्या
ज़रूरत
हिज्र
में
तो
याद
ज़िन्दाबाद
तबाही
इश्क़
में
'आशिक़
की
ज़िन्दाबाद
ज़िन्दाबाद
नया
जंगल
उगाने
में
कई
नस्लें
उजड़ती
हैं
ओ
जंगल
लूटने
वाले
तेरी
औलाद
ज़िन्दाबाद
ये
मुट्ठी
भर
सफल
लोगों
पे
लानत
फेंकते
हैं
और
'अनंत'
ऐलान
करते
हैं
कि
हैं
बर्बाद
ज़िन्दाबाद
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Anant Gupta
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मनाए
जश्न
वो
आते
हुओं
का
जिन्हें
सदमा
नहीं
बिछड़े
हुओं
का
चला
जाएगा
फ़न
सीखे
हुओं
का
मैं
शायर
हूँ
मगर
भूले
हुओं
का
किसी
की
जीत
का
रोना
नहीं
है
हमें
हासिल
है
दिल
हारे
हुओं
का
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Anant Gupta
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