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Anant Gupta
ik jism se jawaani aise bichhad rahi hai
ik jism se jawaani aise bichhad rahi hai | इक जिस्म से जवानी ऐसे बिछड़ रही है
- Anant Gupta
इक
जिस्म
से
जवानी
ऐसे
बिछड़
रही
है
जैसे
दुल्हन
की
मेहँदी
बिस्तर
पे
झड़
रही
है
हथियार
डाले
बैठा
हारा
हुआ
ये
लड़का
और
वो
हसीन
लड़की
दुनिया
से
लड़
रही
है
तंग
आ
चुके
"अनंत''
अब
ले
ले
पतंग
अना
की
मैं
ढील
दे
रहा
हूँ
ये
और
अकड़
रही
है
- Anant Gupta
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सुन
ओ
कहानीकार
कोई
ऐसा
रोल
दे
ऐसे
अदा
करूँं
मेरी
इज़्ज़त
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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बे-ख़ुदी
में
ले
लिया
बोसा
ख़ता
कीजे
मुआ'फ़
ये
दिल-ए-बेताब
की
सारी
ख़ता
थी
मैं
न
था
Bahadur Shah Zafar
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ज़ख़्म
की
इज़्ज़त
करते
हैं
देर
से
पट्टी
खोलेंगे
चेहरा
पढ़ने
वाले
चोर
गठरी
थोड़ी
खोलेंगे
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Khurram Afaq
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हम
ने
क़ुबूल
कर
लिया
अपना
हर
एक
जुर्म
अब
आप
भी
तो
अपनी
अना
छोड़
दीजिए
Harsh saxena
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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तू
मोहब्बत
नहीं
समझती
है
हम
भी
अपनी
अना
में
जलते
हैं
इस
दफा
बंदिशें
ज़ियादा
हैं
छोड़
अगले
जनम
में
मिलते
हैं
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Ritesh Rajwada
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उम्र
जो
बे-ख़ुदी
में
गुज़री
है
बस
वही
आगही
में
गुज़री
है
Gulzar Dehlvi
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ख़ुदी
को
कर
बुलंद
इतना
कि
हर
तक़दीर
से
पहले
ख़ुदा
बंदे
से
ख़ुद
पूछे
बता
तेरी
रज़ा
क्या
है
Allama Iqbal
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दिन
रात
मय-कदे
में
गुज़रती
थी
ज़िंदगी
'अख़्तर'
वो
बे-ख़ुदी
के
ज़माने
किधर
गए
Akhtar Shirani
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होश
वालों
को
ख़बर
क्या
बे-ख़ुदी
क्या
चीज़
है
इश्क़
कीजे
फिर
समझिए
ज़िंदगी
क्या
चीज़
है
Nida Fazli
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दिखावा
ही
करना
है
तो
फिर
बड़ा
कर
तू
शायर
नहीं
ख़ुद
को
'आशिक़
कहा
कर
बदन
से
उछल
कर
निकल
आएगी
रूह
मेरे
ख़्वाब
में
ग़ैर
को
मत
छुआ
कर
बहुत
देर
कर
दी
ये
कहने
में
मैंने
ज़रा
तो
सुनो
मुझको
इतना
सुनाकर
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Anant Gupta
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बदन
की
क्या
ज़रूरत
हिज्र
में
तो
याद
ज़िन्दाबाद
तबाही
इश्क़
में
'आशिक़
की
ज़िन्दाबाद
ज़िन्दाबाद
नया
जंगल
उगाने
में
कई
नस्लें
उजड़ती
हैं
ओ
जंगल
लूटने
वाले
तेरी
औलाद
ज़िन्दाबाद
ये
मुट्ठी
भर
सफल
लोगों
पे
लानत
फेंकते
हैं
और
'अनंत'
ऐलान
करते
हैं
कि
हैं
बर्बाद
ज़िन्दाबाद
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Anant Gupta
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बताना
गर
दिखें
तुम
को
भटकते
पाँव
के
छाले
कई
बरसों
से
ग़ाएब
हैं
हमारे
पाँव
के
छाले
किसी
के
पाँव
में
सूखे
किसी
की
आँख
के
आँसू
किसी
की
आँख
में
फूटे
किसी
के
पाँव
के
छाले
फ़लक
के
पार
दर्शी
फ़र्श
पर
कब
से
खड़ा
कोई
सितारे
लग
रहे
हैं
जो
हैं
उस
के
पाँव
के
छाले
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Anant Gupta
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मनाए
जश्न
वो
आते
हुओं
का
जिन्हें
सदमा
नहीं
बिछड़े
हुओं
का
चला
जाएगा
फ़न
सीखे
हुओं
का
मैं
शायर
हूँ
मगर
भूले
हुओं
का
किसी
की
जीत
का
रोना
नहीं
है
हमें
हासिल
है
दिल
हारे
हुओं
का
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Anant Gupta
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साथ
नाकामी
लिए
फिरते
हैं
हम
आप
को
या'नी
लिए
फिरते
हैं
हम
तू
कभी
हम
को
कहीं
मिल
तो
सही
तिश्नगी
पानी
लिए
फिरते
हैं
हम
मौत
आने
तक
तलाशेंगे
उसे
ज़िंदगी
जिस
की
लिए
फिरते
हैं
हम
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Anant Gupta
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