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Anant Gupta
manaae jashn vo aate huoon ka
manaae jashn vo aate huoon ka | मनाए जश्न वो आते हुओं का
- Anant Gupta
मनाए
जश्न
वो
आते
हुओं
का
जिन्हें
सदमा
नहीं
बिछड़े
हुओं
का
चला
जाएगा
फ़न
सीखे
हुओं
का
मैं
शायर
हूँ
मगर
भूले
हुओं
का
किसी
की
जीत
का
रोना
नहीं
है
हमें
हासिल
है
दिल
हारे
हुओं
का
- Anant Gupta
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अभी
ज़िंदा
है
माँ
मेरी
मुझे
कुछ
भी
नहीं
होगा
मैं
घर
से
जब
निकलता
हूँ
दु'आ
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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जनमदिन
हिज्र
का
कुछ
यूँँ
मनाया
किया
अनब्लॉक
तुमको
आज
हमने
Tanoj Dadhich
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मैं
नज़र
से
पी
रहा
था
तो
ये
दिल
ने
बद-दुआ
दी
तिरा
हाथ
ज़िंदगी
भर
कभी
जाम
तक
न
पहुँचे
Shakeel Badayuni
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दफ्न
ताबूत
में
कर
तिरी
हर
ख़ुशी
जश्न
कैसे
मनाते
है
मय्यत
पे
भी
ख़ास
तारीख़
थी
इम्तिहाँ
की
मगर
आज
बारात
उसकी
बुला
ली
गई
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Shilpi
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उस
से
मिले
ज़माना
हुआ
लेकिन
आज
भी
दिल
से
दु'आ
निकलती
है
ख़ुश
हो
जहाँ
भी
हो
Mohammad Alvi
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तेरे
होंठो
से
गर
इक
काम
लेना
हो
तेरे
होंठो
से
हम
बस
इक
दु'आ
लेंगे
Siddharth Saaz
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जन्मदिन
पर
भी
मुझे
वो
याद
अब
करता
नहीं
इस
ज़माने
में
कोई
इतना
भी
मुफ़्लिस
होगा
क्या
Harsh saxena
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जब
भी
कश्ती
मिरी
सैलाब
में
आ
जाती
है
माँ
दु'आ
करती
हुई
ख़्वाब
में
आ
जाती
है
Munawwar Rana
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दवा
से
हल
न
हुआ
तो
दु'आ
पे
छोड़
दिया
तिरा
मोआ'मला
हम
ने
ख़ुदा
पे
छोड़
दिया
Khurram Afaq
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उम्र
भर
जिसने
न
माँगा
हो
ख़ुदास
कुछ
भी
उस
ने
बस
तुम
से
मोहब्बत
की
दु'आ
माँगी
है
Shadab Asghar
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दिखावा
ही
करना
है
तो
फिर
बड़ा
कर
तू
शायर
नहीं
ख़ुद
को
'आशिक़
कहा
कर
बदन
से
उछल
कर
निकल
आएगी
रूह
मेरे
ख़्वाब
में
ग़ैर
को
मत
छुआ
कर
बहुत
देर
कर
दी
ये
कहने
में
मैंने
ज़रा
तो
सुनो
मुझको
इतना
सुनाकर
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Anant Gupta
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इक
जिस्म
से
जवानी
ऐसे
बिछड़
रही
है
जैसे
दुल्हन
की
मेहँदी
बिस्तर
पे
झड़
रही
है
हथियार
डाले
बैठा
हारा
हुआ
ये
लड़का
और
वो
हसीन
लड़की
दुनिया
से
लड़
रही
है
तंग
आ
चुके
"अनंत''
अब
ले
ले
पतंग
अना
की
मैं
ढील
दे
रहा
हूँ
ये
और
अकड़
रही
है
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Anant Gupta
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बदन
की
क्या
ज़रूरत
हिज्र
में
तो
याद
ज़िन्दाबाद
तबाही
इश्क़
में
'आशिक़
की
ज़िन्दाबाद
ज़िन्दाबाद
नया
जंगल
उगाने
में
कई
नस्लें
उजड़ती
हैं
ओ
जंगल
लूटने
वाले
तेरी
औलाद
ज़िन्दाबाद
ये
मुट्ठी
भर
सफल
लोगों
पे
लानत
फेंकते
हैं
और
'अनंत'
ऐलान
करते
हैं
कि
हैं
बर्बाद
ज़िन्दाबाद
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Anant Gupta
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साथ
नाकामी
लिए
फिरते
हैं
हम
आप
को
या'नी
लिए
फिरते
हैं
हम
तू
कभी
हम
को
कहीं
मिल
तो
सही
तिश्नगी
पानी
लिए
फिरते
हैं
हम
मौत
आने
तक
तलाशेंगे
उसे
ज़िंदगी
जिस
की
लिए
फिरते
हैं
हम
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Anant Gupta
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बताना
गर
दिखें
तुम
को
भटकते
पाँव
के
छाले
कई
बरसों
से
ग़ाएब
हैं
हमारे
पाँव
के
छाले
किसी
के
पाँव
में
सूखे
किसी
की
आँख
के
आँसू
किसी
की
आँख
में
फूटे
किसी
के
पाँव
के
छाले
फ़लक
के
पार
दर्शी
फ़र्श
पर
कब
से
खड़ा
कोई
सितारे
लग
रहे
हैं
जो
हैं
उस
के
पाँव
के
छाले
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