vo jo din hijr-e-yaar men guzre | वो जो दिन हिज्र-ए-यार में गुज़रे

  - Ameer Raza Mazhari
वोजोदिनहिज्र-ए-यारमेंगुज़रे
कुछतड़पकुछक़रारमेंगुज़रे
वहीहासिलथेज़िंदगानीके
चारदिनजोबहारमेंगुज़रे
क्याकियातुमसेकैसेकैसेवहम
दिल-ए-बे-ए'तिबारमेंगुज़रे
कितनीकलियोंकेकितनेफूलोंके
क़ाफ़िलेनौ-बहारमेंगुज़रे
ज़िंदगीकेलिएमिलेथेजोदिन
मौतकेइंतिज़ारमेंगुज़रे
हसरतोंकेहुजूममेंतिरीयाद
जैसेमहमिलग़ुबारमेंगुज़रे
हमचमनमेंरहेतोऐसेरहे
जैसेदिनख़ारज़ारमेंगुज़रे
ग़म-ए-जानाँसेबचरहेथेजोदिन
वोग़म-ए-रोज़गारमेंगुज़रे
ज़िंदगीकीयहीतमन्नाथी
आपकीरहगुज़ारमेंगुज़रे
जाँ-निसारोंकाजाएज़ाथावहाँ
हमभीपिछलीक़तारमेंगुज़रे
काटेकटतानहींवोवक़्त'रज़ा'
जोकिसीइंतिज़ारमेंगुज़रे
  - Ameer Raza Mazhari
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy