sunen bahaar ki rangeen-bayaaniyaan kya kya | सुनें बहार की रंगीं-बयानियाँ क्या क्या

  - Ameer Raza Mazhari
सुनेंबहारकीरंगीं-बयानियाँक्याक्या
कहींतबस्सुम-ए-गुलनेकहानियाँक्याक्या
दयाजवाबकुछमुस्कुराकेरहगएफूल
ज़बान-ए-ख़ारनेकींबद-ज़बानियाँक्याक्या
बढ़ानाक़ा-ए-लैलाबग़ैरनाला-ए-क़ैस
हुनरदिखातीरहींसारबानियाँक्याक्या
मिज़ाज-ए-संगपिघलाकिथासोज़-ए-कलीम
असापटकतीरहींक़हर-मानियाँक्याक्या
ज़बान-ए-अक़्लपेकुछहैज़बान-ए-इश्क़पेकुछ
तिरेसुकूतसेनिकलींकहानियाँक्याक्या
देताहुस्नअगरदिलकोइश्क़काशो'ला
ख़ुदअपनीआगमेंजलतींजवानियाँक्याक्या
मिज़ाज-ए-इश्क़नेपकड़ाए'तिबारकारंग
शरीक-ए-वहमरहींख़ुश-गुमानियाँक्याक्या
जरसभीचुपरहाटूटीकारवाँकीभीनींद
सुकूत-ए-दश्तनेकींनौहा-ख़्वानियाँक्याक्या
पुकारतीहै'रज़ा'गर्द-ए-कारवाँलेकिन
बनीहैंबार-ए-सफ़रसरगिरानियाँक्याक्या
  - Ameer Raza Mazhari
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