kise khabar thii ki jeete jee bhi vo daur aayega zindagi ka | किसे ख़बर थी कि जीते जी भी वो दौर आएगा ज़िंदगी का

  - Ameer Raza Mazhari
किसेख़बरथीकिजीतेजीभीवोदौरआएगाज़िंदगीका
किहोगामहसूसहरनफ़सयेकोईमेरामैंकिसीका
हुदूद-ए-वहम-ओ-गुमाँसेगुज़रामकाँतोक्याला-मकाँसेगुज़रा
रुकेगाआख़िरकहाँपहुँचकरयेकारवाँज़ौक़-ए-आगहीका
जोमेरेदिलसेथाउनकोकरनाकरसकींआपकीनिगाहें
मिरीतबीअतमेंनक़्सजोहैक़ुसूरहैवोभीआपहीका
हैक़ाबिल-ए-रहमउनकीहालतकीजिएआपउनसेनफ़रत
दर-अस्लएहसास-ए-कमतरीहैजिन्हेंहैकुछनाज़बरतरीका
सिखानेवालेतोआएपैहमहरइकज़मींपरहरइकज़माँमें
मगरहमऐसेहीबद-गुहरथेसलीक़ाआयाज़िंदगीका
येहमनेमानाकिइसजहाँमेंख़ुलूस-ए-जिंस-ए-गराँहैलेकिन
कभीतोयारोख़ुलूसबरतोभरमतोरहजाएदोस्तीका
जोहुस्न-ए-पुर-कारपरफ़िदाहैंउन्हें'रज़ा'कौनयेबताए
वोहुस्नहैफ़ित्ना-ए-क़यामतलगाएग़ाज़ाजोसादगीका
  - Ameer Raza Mazhari
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