rahguzar-baashon ko saa.e ki bhi kya haajat nahin | रहगुज़र-बाशों को साए की भी क्या हाजत नहीं

  - Ameer Raza Mazhari
रहगुज़र-बाशोंकोसाएकीभीक्याहाजतनहीं
पूछतेहैंआलम-ए-नौतेरेमें'मारोंसेहम
क्याख़बरथीकेमंज़िलपरवोहोगाचाकचाक
जोबचालाएथेदामनराहकेख़ारोंसेहम
जैसेसायाभीगुनाहोंकानहींहमपरपड़ा
किसक़दरदामन-कशीदाहैंगुनहगारोंसेहम
दमलेंगेजबतलकयेसामनेसेहटजाएँ
टक्करेंलेतेरहेंगेऊँचीदीवारोंसेहम
आपग़म-ख़्वारीकीज़हमतमतगवाराकीजिए
इल्तिजाकरतेहैंअबयेअपनेग़म-ख़्वारोंसेहम
अपनीनादारीसेख़ुदअपनीनज़रमेंहैंसुबुक
इसक़दरमरऊबहैंदौलतकेअम्बारोंसेहम
होरहेहैंहौसलेपूरेमशिय्यतके'रज़ा'
लेरहेहैंबाजमेहर-ओ-माहसेतारोंसेहम
  - Ameer Raza Mazhari
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