hazaar sheva-e-rangeen hai ik jafaa ke li.e | हज़ार शेवा-ए-रंगीं है इक जफ़ा के लिए

  - Ameer Raza Mazhari
हज़ारशेवा-ए-रंगींहैइकजफ़ाकेलिए
निगाहचाहिएनैरंगी-ए-अदाकेलिए
सवाद-ए-फ़िक्रसेउभरीतिरीहसीननिगाह
मैंशम्अ'ढूँढ़रहाथारह-ए-वफ़ाकेलिए
वोरंज-ए-राहहोयाख़ौफ़-ए-गुमरहीदोस्त
जोराह-रौकेलिएहैवोरहनुमाकेलिए
येबंदगीयेरियाज़तयेज़ोहदयेतक़्वा
येसबख़ुदीकेलिएहैकिहैख़ुदाकेलिए
येवक़्तवोहैकिदीवानातोड़देज़ंजीर
किखुलरहीहैवोज़ुल्फ़-ए-सियहदु'आकेलिए
मिटामिटाकेबनाएगएख़म-ए-गेसू
पड़ीगिरहपेगिरहएकमुब्तलाकेलिए
सुकूत-ए-शबमेंकिठहरीहैकाएनातकीनब्ज़
दिलआश्नाकाधड़कताहैआश्नाकेलिए
बसएकनिगाहनेदोनोंकोदेरखाहैफ़रेब
'रज़ा'तुम्हारेलिएहैतुमरज़ाकेलिए
  - Ameer Raza Mazhari
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